Dhatu Adhatu–Laghu Uttariy Prashn(Class10 Science) -2026
धातु एवं अधातु ( लघु उत्तरीय प्रश्न )
Class 10th Science Subjective - Dhatu aur adhatu subjective Question Answer For Bihar Board। यह पेज BSEB (Bihar School Examination Board) Class 10 Science के अध्याय "धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)" के लघु उत्तरीय प्रश्नों का संपूर्ण संग्रह है। ये सभी प्रश्न बोर्ड परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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📖 लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर
उत्तर – बह तत्व जो आवर्त सारणी के दाएँ भाग में रखी जाती है और जिनमे चमक, धात्विक ध्वनी, कठोरता, अघातवर्धनियता , तन्यता, विधुत तथा ऊष्मा कि चालकता, अत्यधिक घनत्व आदि का गुण हो, एवं इनके आक्साइड क्षारीय प्रकृति के हो धातु कहलाते हैं | जैसे -लोहा , सोडियम, पोटैसियम, सोना चाँदी आदि
उत्तर - अधातु ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं — यानी ये आसानी से बिजली और गर्मी नहीं प्रवाहित करते।
अधातु सामान्यतः भंगुर होते हैं — हथौड़े से पीटने पर ये टूट जाते हैं, इन्हें पतली चादर में नहीं बनाया जा सकता।
उत्तर - अयस्क (Ore) से अशुद्धियाँ हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुओं का परिष्करण कहते हैं। अतः जब अयस्क से मिट्टी, रेत, गंधक आदि अशुद्ध पदार्थ हटाकर शुद्ध धातु निकाली जाती है, तो उसे ही परिष्करण (Refining) कहा जाता है।
(i) कमरे के ताप पर द्रव होता है।
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक हाता है।
(iv) ऊष्मा का कुचालक होता है।
उत्तर –
(i) कमरे के ताप पर द्रव – पारा
(ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है – सोडियम एवं पोटैशियाम्म
(iii) ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक - सोना और चाँदी
(iv) ऊष्मा का कुचालक – लेड और मरकरी
उत्तर - किसी परमाणु द्वारा जितने इलेक्ट्रॉन त्यागे, ग्रहण किए या साझा किए जाते हैं, वही उसकी संयोजकता कहलाती है।
हाइड्रोजन (H) 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता है → इसकी संयोजकता 1
ऑक्सीजन (O) 2 इलेक्ट्रॉन साझा करती है → इसकी संयोजकता 2
उत्तर - नाइट्रिक अम्ल एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक (Strong Oxidising Agent) होता है। यह धातु से निकलने वाले हाइड्रोजन को तुरंत ऑक्सीकरण करके जल (H₂O) में बदल देता है। इसलिए हाइड्रोजन गैस बाहर नहीं निकल पाती।
बहुत पतले (Dilute) नाइट्रिक अम्ल के साथ मैग्नीशियम (Mg), मैंगनीज (Mn) कभी-कभी हाइड्रोजन गैस निकाल देते हैं।
(i) खनिज (ii) अयस्क (iii) गैंग (iv) निस्तापन (v) भर्जन
उत्तर -
(i) खनिज (Minerals) :- वे प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की सतह में पाए जाने वाले रासायनिक यौगिक, जिनमें धातु या अधातु किसी न किसी रूप में उपस्थित रहती है, खनिज कहलाते हैं।
(ii) अयस्क (Ore) :- वे खनिज जिनसे धातु अधिकतम मात्रा में हो और उन को किफ़ायती तथा सरल विधि से प्राप्त किया जा सके, अयस्क कहलाते हैं।
(iii) गैंग (Gangue) :- अयस्क के साथ मिले अवांछिनिय अशुद्ध पदार्थ जैसे—बालू, मिट्टी, कंकड़ आदि को गैंग या गैंगे कहा जाता है।
(iv) निस्तापन (Concentration / Dressing of Ore)
अयस्क से गैंग (अशुद्धियाँ) हटाकर धातु–संपन्न अंश को एकत्रित करने की प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं। (इसे अयस्क का सघनन भी कहते हैं।)
(v) भर्जन (Roasting) :- सल्फ़ाइड अयस्कों को अधिक ताप पर वायु की उपस्थिति में गर्म करके धातु ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया भर्जन कहलाती है।
उत्तर - थर्मिट अभिक्रिया (Thermite Reaction) वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें एल्युमिनियम पाउडर किसी धातु के ऑक्साइड (मुख्यतः आयरन ऑक्साइड) के साथ तीव्र उष्माक्षेपी अभिक्रिया करता है और बहुत अधिक ऊष्मा पैदा होती है।
उत्तर - सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं, क्योंकि ये बहुत कम अभिक्रियाशील (कम reactive) होती हैं। इन्हें असंक्षारणीय धातुएँ (Noble Metals) भी कहा जाता है।
उत्तर - जिन धातुओं का उपयोग देश की रक्षा, युद्ध सामग्री, हथियार, मिसाइल, परमाणु ऊर्जा और सैन्य उपकरण बनाने में किया जाता है, उन्हें सामरिक धातु कहते हैं। जैसे टाइटेनियम युरेनियम, मैग्नेशियम, एल्मुनियम , निकेल
उत्तर - दो या दो से अधिक धातुओं को या किसी धातु को किसी अधातु के साथ निश्चित अनुपात में मिलाकर जो पदार्थ बनाया जाता है, उसे मिश्रधातु कहते हैं।
पीतल (Brass) = तांबा + जस्ता
कांसा (Bronze) = तांबा + टिन
उत्तर : धातुओं के ऐसे आक्साइड जो ऑक्साइड अम्ल और क्षार—दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उन्हें द्विधर्मी ऑक्साइड कहते हैं।
उत्तर - जब शुद्ध सोने में किसी अन्य धातु (जैसे तांबा या चांदी) को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है, तो जो मिश्रण बनता है उसे सोने की मिश्रधातु कहते हैं। इस मिश्रण में 91.6 % सोना तथा 8.4% चाँदी को मिलाकर तैयार किया जाता है |ऐसा करने से सोने में कठोरता और मजबूती आती है|
उत्तर-
👉 धातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं और अम्ल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस निकालती हैं।
👉 अधातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाती हैं और सामान्यतः अम्ल से हाइड्रोजन गैस नहीं निकालतीं।
उत्तर –
👉 आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च होता है क्योंकि उनके धनायन और ऋणायन के बीच बहुत मजबूत वैद्युत आकर्षण बल होता है।
इस आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अधिक ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए उनका गलनांक अधिक होता है।
उत्तर – सोडियम, पोटैशियम एक अत्यधिक क्रियाशील (अति अभिक्रियाशील) धातु है। यह हवा और नमी (पानी) के संपर्क में आते ही तेजी से प्रतिक्रिया करके आग पकड़ सकता है।
इसीलिए सोडियम को हवा और नमी से बचाने के लिए केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है। ताकि कोई दुर्घटना न हो |
उत्तर -
आघातवर्ध्यता (Malleability) का अर्थ - 👉 किसी धातु का वह गुण जिससे उसे पीटकर पतली चादर (शीट) बनाया जा सके, उसे आघातवर्ध्यता कहते हैं।
तन्यता (Ductility) का अर्थ 👉 किसी धातु का वह गुण जिससे उसे खींचकर पतला तार बनाया जा सके, उसे तन्यता कहते हैं।
खनिज और अयस्क में अंतर
| खनिज (Mineral) | अयस्क (Ore) |
|---|---|
| पृथ्वी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले धातु के यौगिक को खनिज कहते हैं। | वह खनिज जिससे धातु को आर्थिक रूप से निकाला जा सके, उसे अयस्क कहते हैं। |
| सभी खनिज धातु निकालने योग्य नहीं होते। | सभी अयस्कों से धातु अवश्य निकाली जा सकती है। |
| उदाहरण: बॉक्साइट, हेमेटाइट | उदाहरण: बॉक्साइट (एल्युमिनियम का अयस्क), हेमेटाइट (लोहा का अयस्क) |
निस्तापन और भर्जन में अंतर
| निस्तापन (Calcination) | भर्जन (Roasting) |
|---|---|
| हवा की अनुपस्थिति या कम हवा में गरम किया जाता है | अधिक मात्रा में हवा में गरम किया जाता है |
| कार्बोनेट अयस्कों के लिए उपयोग होता है | सल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग होता है |
| CO₂ गैस निकलती है | SO₂ गैस निकलती है |
| नमी और गैसीय अशुद्धियाँ हटती हैं | सल्फर और अन्य अशुद्धियाँ हटती हैं |
| उदाहरण: ZnCO₃ → ZnO | उदाहरण: ZnS → ZnO |
उत्तर - तांबा हवा और गर्म पानी से आसानी से अभिक्रिया नहीं करता और उस पर जंग नहीं लगती। जबकि लोहा गर्म पानी और भाप से जल्दी जंग लग जाता है, इसलिए गर्म जल का टैंक तांबे से बनाया जाता है, लोहे से नहीं।
उत्तर - एल्युमिनियम की सतह पर हवा के संपर्क में आते ही एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) की एक पतली परत बन जाती है। एल्युमिनियम की सतह पर बनने वाली एल्युमिनियम ऑक्साइड परत के कारण यह भोजन से अभिक्रिया नहीं करता, इसलिए इससे बर्तन बनाए जाते हैं।
उत्तर - संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातु हवा, नमी या रसायनों के संपर्क में आकर धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है।
👉 संक्षारण से बचने के लिए धातु पर पेंट करना, तेल लगाना या जस्ता की परत (गैल्वनीकरण) चढ़ाना उपयोगी उपाय हैं।
उत्तर -
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > Cu > Ag > Au
ऊत्तर - स्टेनलेस स्टील लोहे (Iron), क्रोमियम (Chromium) और निकेल (Nickel) की मिश्रधातु है।
जिस से लोहे में जंग न लगने का गुण आजाता है और यह अधिक मजबूत हो जाता है।
उत्तर -
👉 मिश्रधातु वह पदार्थ है जो दो या दो से अधिक धातुओं या किसी धातु व अधातु को मिलाकर बनाया जाता है।
👉 पीतल (Brass) = तांबा + जस्ता,
👉 कांसा (Bronze) = तांबा + टिन।
उत्तर - प्लैटिनम, सोना और चांदी चमकदार, आकर्षक तथा आसानी से आकार देने योग्य (लायक) धातुएँ हैं।
इसके साथ ही ये जंग नहीं लगने वाली (असंक्षारणीय) धातुएँ होती हैं, इसलिए इनका उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।
उत्तर - लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर पेंट किया जाता है, तेल या ग्रीस लगाया जाता है अथवा जस्ता की परत चढ़ाना (गैल्वनीकरण) जंग (संक्षारण) से बचाया जाता है|
उत्तर - आयस्क बह खनिज है जिनमें अधिक मात्रा में धातु पाया जाता है और उन्हें आसानी से उस धातु को अलग कर लिया जाता है आयस्क कहलाता है| जैसे – बाक्साईट
उत्तर – जस्ता के ख़ास अयस्क -
- (i) जिंक ब्लेड (ZnS) और
- (ii) जिंक स्पायर (ZnCO3) या कैलेमाईन
- (iii) जिनकाइट (ZnO)
उत्तर – धातु कि अभिक्रिया उस के क्रियाशीलता पर निर्भर करता है और जो धातुएँ ठन्डे अभिक्रिया करती है वे H2 (हाइड्रोजन) गैस और धातु के आक्साइड का घोल निर्माण करती है|
उत्तर - आसवित जल में लवण और आयन नहीं घुले होते, इसलिए वह विद्युत का चालन नहीं करता। जबकि वर्षा जल में वायु से घुले CO₂, अम्लीय गैसें और लवण आयन होते हैं, इसलिए वह विद्युत का चालन करता है।
उत्तर - अयस्क के सांद्रण से तात्पर्य (मतलब) उस प्रक्रिया से है जिसमें अयस्क से मिट्टी, रेत और अन्य अशुद्धियाँ हटाकर उसमें से शुद्ध धातु की मात्रा प्राप्त जाती है।
इस प्रक्रिया से धातु निकालना आसान और किफायती (सस्ता) है।
उत्तर - ऐनोडीकरण (Anodising):- वह प्रक्रिया है जिसमें एल्युमिनियम की सतह पर एक मोटी ऑक्साइड परत बनाई जाती है। एनोडिकरण कहलाता है
👉 महत्व- इससे एल्युमिनियम जंग से सुरक्षित रहता है, और अधिक मजबूत तथा चमकीला हो जाता है।
अ. स्टील ब. पीतल स. कांसा
उत्तर –
अ. – स्टील :- लोहा , निकेल , क्रोमियम ,कार्बन
उपयोग – बरतन , चाकू , छूरी , गाड़ी के पार्ट पुर्जे
ब. – पीतल – ताँबा व जस्ता
उपयोग – बरतन खाने पकाने का , मूर्ति, वैज्ञानिक उपकरण, तार आदि
स. – काँसा – ताँबा एवं तीन
उपयोग – सिक्का , मूर्ति , मेडल आदि
