इस पेज पर BSEB Class 10th Science के अध्याय “विद्युत धारा (Electric Current)” के सभी महत्वपूर्ण Objective, Short और Long Question Answer दिए गए हैं। यह नोट्स बिहार बोर्ड कि परीक्षा 2025-2026 की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।
⚡ विद्युत धारा (Electric Current) 🔌
BSEB Class 10 Physics - Complete Question Bank with Answers
बिहार बोर्ड कक्षा 10 भौतिकी - सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
For Bihar Board Matric Examination 2025-26
⚛️ By Sibtain Sir - Padho India Hub 🔬
⭐ वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) - 1 अंक
प्रश्न 1
विद्युत धारा का SI मात्रक क्या है? (2016, 2021, 2022)
उत्तरएम्पियर (Ampere - A)
प्रश्न 2
विद्युत विभव / विभवांतर का SI मात्रक क्या है? (2015, 2020)
उत्तरवोल्ट (Volt - V)
प्रश्न 3
प्रतिरोध (Resistance) का SI मात्रक क्या है? (2014, 2019)
उत्तरओम (Ohm - Ω)
प्रश्न 4
प्रतिरोधकता (Resistivity) का SI मात्रक क्या है? (2018, 2022, 2024)
उत्तरओम-मीटर (Ohm-meter - Ωm)
प्रश्न 5
विद्युत शक्ति (Power) का SI मात्रक क्या है? (2013, 2023)
उत्तरवाट (Watt - W)
प्रश्न 6
1 kWh (1 यूनिट) में कितने जूल होते हैं? (2019, 2024)
उत्तर3.6 × 10⁶ जूल
प्रश्न 7
विद्युत बल्ब का तंतु (Filament) किस धातु का बना होता है? (2013, 2021)
उत्तरटंगस्टन (Tungsten)
प्रश्न 8
हमारे घरों में विद्युत आपूर्ति की जाती है, वह है:
उत्तर220V पर प्रत्यावर्ती धारा (AC - Alternating Current)
📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) - 2 अंक
प्रश्न 9
विद्युत आवेश क्या है? विद्युत आवेश कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर
विद्युत आवेश की परिभाषा:
किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अन्य आवेशित वस्तुओं को आकर्षित या विकर्षित करती है, विद्युत आवेश (Electric Charge) कहलाता है।
या
किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता या कमी के कारण उसमें उत्पन्न विद्युत प्रभाव को विद्युत आवेश कहते हैं।
किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अन्य आवेशित वस्तुओं को आकर्षित या विकर्षित करती है, विद्युत आवेश (Electric Charge) कहलाता है।
या
किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता या कमी के कारण उसमें उत्पन्न विद्युत प्रभाव को विद्युत आवेश कहते हैं।
• इसे Q से दर्शाते हैं
• SI इकाई: कूलॉम (Coulomb - C)
यह दो प्रकार का होता है:
1. धन आवेश (+)
2. ऋण आवेश (-)
• SI इकाई: कूलॉम (Coulomb - C)
यह दो प्रकार का होता है:
1. धन आवेश (+)
2. ऋण आवेश (-)
प्रश्न 10
विद्युत धारा क्या है? विद्युत धारा का SI मात्रक लिखें।
उत्तर
किसी चालक के भीतर किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच आवेश के लगातार प्रवाह को विद्युत धारा कहते है।
SI मात्रक: ऐम्पियर (Ampere - A)
सूत्र: I = Q/t
सूत्र: I = Q/t
प्रश्न 11
💡 चित्र: विद्युत बल्ब की संरचना (नामांकित)
विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर
प्रश्न 12
विद्युत विभव और विभवांतर में क्या अंतर है?
उत्तर| आधार | विद्युत विभव (Electric Potential) | विभवांतर (Potential Difference) |
|---|---|---|
| परिभाषा | किसी बिंदु पर इकाई धन आवेश को अनंत से वहाँ लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है। | दो बिंदुओं के बीच इकाई धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य विभवांतर कहलाता है। |
| अर्थ | किसी बिंदु की विद्युत स्थिति बताता है। | दो बिंदुओं के बीच ऊर्जा अंतर बताता है। |
प्रश्न 13
विद्युत संचरण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमीनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर
विद्युत संचरण के लिए प्रायः कॉपर और एल्युमिनियम के तारों का उपयोग किया जाता है क्योंकि:
- इनकी विद्युत चालकता बहुत अधिक होती है
- प्रतिरोध बहुत कम होता है
- धारा आसानी से प्रवाहित होती है
- ऊर्जा की हानि कम होती है
प्रश्न 14
विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बना कर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं?
उत्तर
विद्युत टोस्टर और विद्युत इस्तरी के तापन अवयव शुद्ध धातु के बजाय मिश्रधातु से इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि मिश्रधातु में:
• प्रतिरोध अधिक होता है, जिससे अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है
• गलनांक (melting point) ऊँचा होता है, इसलिए वे जल्दी नहीं पिघलते
• उच्च ताप पर ऑक्सीकरण कम होता है, जिससे तत्व जल्दी खराब नहीं होते
• ताप बदलने पर प्रतिरोध में अधिक परिवर्तन नहीं होता (स्थिर रहता है)
• गलनांक (melting point) ऊँचा होता है, इसलिए वे जल्दी नहीं पिघलते
• उच्च ताप पर ऑक्सीकरण कम होता है, जिससे तत्व जल्दी खराब नहीं होते
• ताप बदलने पर प्रतिरोध में अधिक परिवर्तन नहीं होता (स्थिर रहता है)
प्रश्न 15
निम्न प्रश्नों के हल सारणी में दिए हुए आँकड़ों के आधार पर कीजिए।
उत्तर
निम्न प्रश्नों के हल सारणी में दिए हुए आँकड़ों के आधार पर कीजिए।
(a) आयरन (Fe) तथा मरकरी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?
उत्तर
(a) आयरन (Fe) की विद्युत प्रतिरोधकता = 10.0×10⁻⁸ ओम-मी
मकरी (Hg) की विद्युत प्रतिरोधकता = 94.0×10⁻⁸ ओम-मी
मकरी (Hg) की विद्युत प्रतिरोधकता = 94.0×10⁻⁸ ओम-मी
अतः आयरन मकरी की अपेक्षा अच्छा विद्युत चालक है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता कम है।
(b) सिल्वर (प्रतिरोधकता = 1.60×10⁻⁸ ओम-मी) सर्वश्रेष्ठ चालक है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता सबसे कम है।
प्रश्न 16
ओम का नियम (Ohm's Law) लिखें। (2011, 2014, 2017, 2021)
उत्तर
यदि किसी चालक के ताप (लंबाई, क्षेत्रफल) में परिवर्तन न हो, तो उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उसके सिरों के बीच उत्पन्न विभवांतर के समानुपाती होती है।
V ∝ I
या
V = IR
या
V = IR
जहाँ R एक नियतांक है जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।
प्रश्न 17
विद्युत विभव और विभवांतर की परिभाषा दें। (2015, 2018)
उत्तर
विभव (Potential): इकाई धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।
विभवांतर (Potential Difference): इकाई धन आवेश को विद्युत परिपथ के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं।
प्रश्न 18
प्रतिरोध क्या है? किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है? (2013, 2019, 2022)
उत्तर
प्रतिरोध: चालक का वह गुण जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है।
किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:
किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:
1. चालक तार की लंबाई पर: R ∝ L
2. चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (मोटाई) पर: R ∝ 1/A
3. चालक के पदार्थ की प्रकृति पर
4. चालक के ताप पर (ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है)
2. चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (मोटाई) पर: R ∝ 1/A
3. चालक के पदार्थ की प्रकृति पर
4. चालक के ताप पर (ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है)
R ∝ l/A
प्रश्न 19
फ्यूज क्या है? विद्युत परिपथ में 'फ्यूज' (Fuse) का क्या उपयोग है? (2016, 2020)
उत्तर
फ्यूज: विद्युत फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है। यह जस्ता, सीसा या टिन के मिश्रधातु का बना तार होता है जिसका गलनांक बहुत कम और प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है।
उपयोग:
जब परिपथ में अतिभारण (Overloading) या लघुपथन (Short-circuit) के कारण धारा का मान सीमा से अधिक हो जाता है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। इससे घर के महंगे उपकरण जलने से बच जाते हैं।
जब परिपथ में अतिभारण (Overloading) या लघुपथन (Short-circuit) के कारण धारा का मान सीमा से अधिक हो जाता है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। इससे घर के महंगे उपकरण जलने से बच जाते हैं।
प्रश्न 20
हमारे घरों में वायरिंग समानांतर क्रम (पार्श्वक्रम) में क्यों की जाती है? (2018, 2024)
उत्तर
समानांतर संयोजन में:
- परिपथ का कुल प्रतिरोध कम हो जाता है
- धारा का वितरण सही तरीके से होता है
- एक उपकरण के बंद होने पर धारा का पथ नहीं टूटता
- बाकी उपकरण चलते रहते हैं
- प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर (220V) मिलता है
📚 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) - 5 अंक
प्रश्न 21
(i) किसी निश्चित समय t में किसी निश्चित प्रतिरोध R वाले चाक में उत्पन्न हुई ऊष्मा का परिणाम (मान) U उस में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा I के वर्ग के समानुपाती होता है।
(ii) किसी निश्चित प्रबलता कि विधुत धारा I द्वारा निश्चित समय t में उत्पन्न ऊष्मा का परिणाम चालक के प्रतिरोध के समनु पाती होता है।
(iii) किसी चालक में एक ही प्रबलता कि धारा भिन्न – भिन्न समय तक प्रवाहित करने पर उत्पन (पैदा) ऊष्मा का परिणाम, धरा प्रवाह के समय t के समानुपाती होता है।
जूल का उष्मीय (तापन) नियम (Joule's Law of Heating) लिखें।
उत्तर
जूल का उष्मीय नियम तीन तरह का है:
(i) किसी निश्चित समय t में किसी निश्चित प्रतिरोध R वाले चाक में उत्पन्न हुई ऊष्मा का परिणाम (मान) U उस में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा I के वर्ग के समानुपाती होता है।
U ∝ I² (जहाँ R और t नियत हो)
(ii) किसी निश्चित प्रबलता कि विधुत धारा I द्वारा निश्चित समय t में उत्पन्न ऊष्मा का परिणाम चालक के प्रतिरोध के समनु पाती होता है।
U ∝ R (जहाँ I और t नियत हो)
(iii) किसी चालक में एक ही प्रबलता कि धारा भिन्न – भिन्न समय तक प्रवाहित करने पर उत्पन (पैदा) ऊष्मा का परिणाम, धरा प्रवाह के समय t के समानुपाती होता है।
U ∝ t (जब I और R नियत हो)
प्रश्न 22
ओम के नियम को लिखें और इसे सत्यापित करने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें। (2012, 2016, 2020, 2024)
उत्तर
ओम का नियम:
यदि किसी चालक के ताप में परिवर्तन न, हो तो उसमें प्रवाहित विधुत – धारा का मान उसके सिरों बीच आरोपित विभ्वांत्र के समानुपाती होता है।
सत्यापन (प्रयोग):
उपकरण: एक शुष्क सेल, एक एमीटर, एक वोल्टमीटर, एक स्विच और एक नाइक्रोम का तार (प्रतिरोध)।
परिपथ: एमीटर को श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर को प्रतिरोध के समानांतर क्रम में जोड़ते हैं।
⚡ चित्र: ओम के नियम के सत्यापन के लिए विद्युत-परिपथ
क्रिया: पहले एक सेल लगाकर एमीटर (धारा) और वोल्टमीटर (विभवांतर) का पठन नोट करते हैं। फिर सेलों की संख्या बढ़ाकर (2, 3, 4 सेल) धारा का मान बदलते हैं और का मान नोट करते हैं।
ग्राफीय प्रदर्शन: पठन को ग्राफ पर दिखने के लिए Y – अक्ष पर धारा (I) एवं X – अक्ष पर विभवान्तर को दर्शाते है।
📊 चित्र: ओम के नियम का सत्यापन (V-I ग्राफ)
यदि किसी चालक के ताप में परिवर्तन न, हो तो उसमें प्रवाहित विधुत – धारा का मान उसके सिरों बीच आरोपित विभ्वांत्र के समानुपाती होता है।
सत्यापन (प्रयोग):
उपकरण: एक शुष्क सेल, एक एमीटर, एक वोल्टमीटर, एक स्विच और एक नाइक्रोम का तार (प्रतिरोध)।
परिपथ: एमीटर को श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर को प्रतिरोध के समानांतर क्रम में जोड़ते हैं।
ग्राफीय प्रदर्शन: पठन को ग्राफ पर दिखने के लिए Y – अक्ष पर धारा (I) एवं X – अक्ष पर विभवान्तर को दर्शाते है।
निष्कर्ष: हम पाते हैं कि V/I का अनुपात हर बार लगभग नियत (Constant) रहता है।
ग्राफ: यदि V (X-अक्ष) और I (Y-अक्ष) के बीच ग्राफ एक सीधी रेखा प्राप्त होती है, जो ओम के नियम को सत्यापित करती है।
ग्राफ: यदि V (X-अक्ष) और I (Y-अक्ष) के बीच ग्राफ एक सीधी रेखा प्राप्त होती है, जो ओम के नियम को सत्यापित करती है।
प्रश्न 23
प्रतिरोधों के पार्श्वक्रम (समानांतर) संयोजन के लिए समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक प्राप्त करें। (2015, 2019)
उत्तर
माना तीन (R₁, R₂, R₃) प्रतिरोध समानांतर क्रम में जुड़े हैं। समानांतर क्रम में सभी प्रतिरोधों पर विभवांतर समान होता है, लेकिन धारा बंट जाती है।
🔗 चित्र: प्रतिरोधों का समानांतर क्रम संयोजन
सामान्य रूप में n प्रतिरोधों के लिए:
- कुल धारा = I
- प्रतिरोध R₁ में धारा = I₁
- प्रतिरोध R₂ में धारा = I₂
- प्रतिरोध R₃ में धारा = I₃
I = I₁ + I₂ + I₃ ----------(i)
ओम के नियम से:
I₁ = V/R₁, I₂ = V/R₂, I₃ = V/R₃
समीकरण (i) I₁, I₂, I₃ में रखने पर:
I = V/R₁ + V/R₂ + V/R₃ ----- (ii)
यदि कुल धारा I और समतुल्य प्रतिरोध R तो ओम के नियम से लिख सकते हैं:
I = V/R ----------- (iii)
अतः:
V/R = V/R₁ + V/R₂ + V/R₃
या
V/R = V(1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃)
अतः:
इसी को समानांतर संयोजन के लिए समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक कहते हैं।
1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃
सामान्य रूप में n प्रतिरोधों के लिए:
1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ + ⋯ + 1/Rₙ
प्रश्न 24
श्रेणीक्रम संयोजन के लिए समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक प्राप्त करें।
उत्तर
मान लीजिए तीन प्रतिरोध R₁, R₂, R₃ को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है और इनके सिरों पर कुल विभवांतर V है। तथा सभी प्रतिरोधों में एक ही धारा (I) प्रवाहित होती है।
🔗 चित्र: प्रतिरोधों का श्रेणीक्रम संयोजन
ओम के नियम से:
तब,
V₁ = IR₁, V₂ = IR₂, V₃ = IR₃ ----- (i)
यदि V₁, V₂, V₃ का कुल विभवान्तर V हैतब,
V = V₁ + V₂ + V₃ -------- (ii)
(ii) में (i) के प्रयोग से:
V = IR₁ + IR₂ + IR₃
V = I(R₁ + R₂ + R₃) ------ (iii)
यदि इस पूरे संयोजन का समतुल्य प्रतिरोध R हो, तो:
V = I(R₁ + R₂ + R₃) ------ (iii)
V = IR -------- (iv)
अतः (iii) एवं (iv) की तुलना करने पर:
IR = I(R₁ + R₂ + R₃)
अतः:
सामान्य रूप (n प्रतिरोधों के लिए):
R = R₁ + R₂ + R₃ (दोनों तरफ से I काटने पर)
R = R₁ + R₂ + R₃ + ⋯ + Rₙ
निष्कर्ष: श्रेणीक्रम संयोजन में समतुल्य प्रतिरोध हमेशा व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है, इसलिए यह अधिक हो जाता है।
प्रश्न 25
विद्युत शक्ति क्या है? सिद्ध करें कि W = Pt होता है।
उत्तर
विद्युत शक्ति: किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के व्यय (खपत) होने की दर को विद्युत शक्ति (P) कहते हैं।
मात्रक: वाट (W)
विद्युत-शक्ति = विद्युत ऊर्जा / समय
या,
P = W/t = I²Rt/t
P = I²R
परंतु, ओम के नियम से,
P = I²R
V = IR
अतः,
P = VI
या,
P = V²/R
अतः, किसी विद्युत-परिपथ में किसी निश्चित समय t में व्यय हुई विद्युत ऊर्जा W ज्ञात करने के लिए विद्युत-शक्ति P को समय t से गुणा कर देते हैं। अर्थात्,
W = Pt
प्रश्न 26
चालक, अचालक, अर्द्धचालक एवं अति चालक से आप क्या समझते हैं? सोदाहरण व्याख्या करें।
उत्तर
1. चालक (Conductor)
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो जाती है, चालक कहलाते हैं।
• इनका प्रतिरोध कम होता है।
• उदाहरण: ताँबा, एल्यूमिनियम, चाँदी, लोहा
• उपयोग: बिजली की तारें
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो जाती है, चालक कहलाते हैं।
• इनका प्रतिरोध कम होता है।
• उदाहरण: ताँबा, एल्यूमिनियम, चाँदी, लोहा
• उपयोग: बिजली की तारें
2. अचालक (Insulator)
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो पाती या बहुत कठिनाई से होती है, अचालक कहलाते हैं।
• इनका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
• उदाहरण: रबर, प्लास्टिक, काँच, लकड़ी
• उपयोग: तारों की कोटिंग
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो पाती या बहुत कठिनाई से होती है, अचालक कहलाते हैं।
• इनका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
• उदाहरण: रबर, प्लास्टिक, काँच, लकड़ी
• उपयोग: तारों की कोटिंग
3. अर्द्धचालक (Semiconductor)
वे पदार्थ जिनकी चालकता चालक और अचालक के बीच होती है, अर्द्धचालक कहलाते हैं।
• इनकी चालकता ताप बढ़ने पर बढ़ती है।
• उदाहरण: सिलिकॉन, जर्मेनियम
• उपयोग: डायोड, ट्रांजिस्टर, चिप्स
वे पदार्थ जिनकी चालकता चालक और अचालक के बीच होती है, अर्द्धचालक कहलाते हैं।
• इनकी चालकता ताप बढ़ने पर बढ़ती है।
• उदाहरण: सिलिकॉन, जर्मेनियम
• उपयोग: डायोड, ट्रांजिस्टर, चिप्स
4. अति चालक (Superconductor)
वे पदार्थ जो बहुत कम ताप पर अपना प्रतिरोध शून्य कर देते हैं और धारा बिना ऊर्जा हानि के बहती है, अति चालक कहलाते हैं।
• उदाहरण: पारा (Mercury), नायोबियम मिश्रधातुएँ
• उपयोग: MRI मशीन, मैग्लेव ट्रेन
वे पदार्थ जो बहुत कम ताप पर अपना प्रतिरोध शून्य कर देते हैं और धारा बिना ऊर्जा हानि के बहती है, अति चालक कहलाते हैं।
• उदाहरण: पारा (Mercury), नायोबियम मिश्रधातुएँ
• उपयोग: MRI मशीन, मैग्लेव ट्रेन
