📖 Hindi Literature Quiz
कबीर के पद (21 प्रश्न)
Question 1 of 21
'कबीर के पद' शीर्षक पाठ साहित्य की विधा है।
✅ Correct Answer: (A) पद
व्याख्या: 'कबीर के पद' भक्ति काव्य की विधा है। पद संगीतबद्ध रचना होती है जिसे गाया जाता है।
Question 2 of 21
कबीर भक्ति धारा के कवि थे?
✅ Correct Answer: (A) निर्गुण भक्ति धारा
व्याख्या: कबीर निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे।
Question 3 of 21
कबीर के अनुसार व्यक्ति किस कारण सत्य की पहचान नहीं कर पाता है?
✅ Correct Answer: (C) दोनों सही हैं
व्याख्या: कबीर के अनुसार अज्ञानता और मूढ़ता (अंधविश्वास) दोनों के कारण व्यक्ति सत्य को नहीं पहचान पाता।
Question 4 of 21
कबीर के अनुसार मनुष्य को कैसा होना चाहिए?
✅ Correct Answer: (A) ईश्वर के प्रति अनुरागी
व्याख्या: कबीर के अनुसार मनुष्य को ईश्वर के प्रति सच्चे मन से अनुरागी (प्रेमी) होना चाहिए, बाह्य दिखावे से नहीं।
Question 5 of 21
'मोको कहाँ ढूंढे, बंदे मैं तो तेरे पास में' प्रस्तुत पंक्ति उद्भुत है
✅ Correct Answer: (C) कबीर के पद से
व्याख्या: यह प्रसिद्ध पंक्ति कबीर के पद से है जो बताती है कि ईश्वर हर जगह है, मंदिर-मस्जिद में नहीं बल्कि हमारे अंदर।
Question 6 of 21
'मैं कहता हाँ आंखिन देखी, तू कहता कागद की लेखी' पंक्ति
✅ Correct Answer: (A) 'कबीर के पद' से
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है। कबीर कहते हैं कि मैं अनुभव (आँखों देखा) की बात करता हूँ, तुम किताबी ज्ञान की।
Question 7 of 21
'कागद' का अर्थ है
✅ Correct Answer: (D) कागज
व्याख्या: 'कागद' का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी या लिखित ज्ञान।
Question 8 of 21
कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति क्या है?
✅ Correct Answer: (A) मानव सेवा
व्याख्या: कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति बाह्य आडंबरों में नहीं, बल्कि मानव सेवा और निर्मल हृदय में है।
Question 9 of 21
'कबीर के पद' शीर्षक पाठ किसकी रचना है?
✅ Correct Answer: (B) कबीरदास
व्याख्या: यह संत कबीरदास की रचना है। कबीर भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं।
Question 10 of 21
कबीर किस काल के कवि है?
✅ Correct Answer: (B) भक्तिकाल
व्याख्या: कबीर भक्तिकाल (14वीं-15वीं सदी) के प्रमुख संत कवि हैं।
Question 11 of 21
कबीर की भाषा कैसी है?
✅ Correct Answer: (D) सधुक्कड़ी
व्याख्या: कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' है - हिंदी, अवधी, ब्रज, पंजाबी आदि भाषाओं का मिश्रण।
Question 12 of 21
कबीर कैसे संत थे?
✅ Correct Answer: (B) निर्गुणवादी
व्याख्या: कबीर निर्गुणवादी संत थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे, मूर्ति पूजा के विरोधी थे।
Question 13 of 21
'मोको' शब्द का अर्थ है
✅ Correct Answer: (C) परम पिता
व्याख्या: 'मोको' का अर्थ है 'मुझको' या 'मुझे'। यह कबीर की बोलचाल की भाषा है।
Question 14 of 21
इनमें कौन निर्गुण भक्ति धारा के कवि हैं?
✅ Correct Answer: (D) जायसी
व्याख्या: मलिक मुहम्मद जायसी निर्गुण भक्ति धारा (सूफी शाखा) के कवि हैं। तुलसी और सूर सगुण भक्ति के हैं।
Question 15 of 21
कबीर के पदों की महत्ता तत्कालीन समय से जुड़ता है बल्कि उनका उपादेयता यथावत है ---
✅ Correct Answer: (C) मध्यकाल में भी
व्याख्या: कबीर के पदों की प्रासंगिकता आज भी समकालीन समय में उतनी ही है। उनके विचार कालजयी हैं।
Question 16 of 21
ईश्वर या अल्लाह को बाहर ढूंढने की जगह उसका अपने भीतर ही साक्षात्कार की बात किसने की है?
✅ Correct Answer: (B) कबीरदास ने
व्याख्या: कबीरदास ने कहा कि ईश्वर को मंदिर-मस्जिद में नहीं, अपने भीतर (हृदय में) खोजो। 'मोको कहाँ ढूंढे बंदे'।
Question 17 of 21
जिसमें ईश्वर के निराकार रूप की आराधना की जाती है उसे कहते है
✅ Correct Answer: (A) निर्गुण भक्तिधारा
व्याख्या: निर्गुण भक्ति धारा में निराकार ब्रह्म की आराधना होती है। कबीर इसी धारा के प्रमुख कवि हैं।
Question 18 of 21
कबीर के पहले पद में किनके विचारों का खंडन किया गया है
✅ Correct Answer: (B) वेशभूषा का
व्याख्या: कबीर ने पहले पद में रूढ़िवादी विचारों, बाह्य आडंबरों और धार्मिक पाखंड का खंडन किया है।
Question 19 of 21
कबीर ने बाह्य-आडंबरों एवं व्यर्थ अनुष्ठानों पर किया है -
✅ Correct Answer: (B) खूब प्रचार
व्याख्या: कबीर ने बाह्य आडंबरों, अनुष्ठानों और धार्मिक पाखंड पर करारा प्रहार किया है।
Question 20 of 21
कागद का अर्थ है -
✅ Correct Answer: (A) पृथ्वी
व्याख्या: 'कागद' शब्द का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी ज्ञान।
Question 21 of 21
तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे – यह पंक्ति किस कविता की है
✅ Correct Answer: (D) कबीर पद
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है जो ईश्वर से कहते हैं कि हमारा और तुम्हारा मन कैसे एक हो।
📋 Complete Answer Key
Q1. 'कबीर के पद' शीर्षक पाठ साहित्य की विधा है।
Answer: (A) पद
व्याख्या: 'कबीर के पद' भक्ति काव्य की विधा है। पद संगीतबद्ध रचना होती है जिसे गाया जाता है।
Answer: (A) पद
व्याख्या: 'कबीर के पद' भक्ति काव्य की विधा है। पद संगीतबद्ध रचना होती है जिसे गाया जाता है।
Q2. कबीर भक्ति धारा के कवि थे?
Answer: (A) निर्गुण भक्ति धारा
व्याख्या: कबीर निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे।
Answer: (A) निर्गुण भक्ति धारा
व्याख्या: कबीर निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे।
Q3. कबीर के अनुसार व्यक्ति किस कारण सत्य की पहचान नहीं कर पाता है?
Answer: (C) दोनों सही हैं
व्याख्या: कबीर के अनुसार अज्ञानता और मूढ़ता (अंधविश्वास) दोनों के कारण व्यक्ति सत्य को नहीं पहचान पाता।
Answer: (C) दोनों सही हैं
व्याख्या: कबीर के अनुसार अज्ञानता और मूढ़ता (अंधविश्वास) दोनों के कारण व्यक्ति सत्य को नहीं पहचान पाता।
Q4. कबीर के अनुसार मनुष्य को कैसा होना चाहिए?
Answer: (A) ईश्वर के प्रति अनुरागी
व्याख्या: कबीर के अनुसार मनुष्य को ईश्वर के प्रति सच्चे मन से अनुरागी (प्रेमी) होना चाहिए, बाह्य दिखावे से नहीं।
Answer: (A) ईश्वर के प्रति अनुरागी
व्याख्या: कबीर के अनुसार मनुष्य को ईश्वर के प्रति सच्चे मन से अनुरागी (प्रेमी) होना चाहिए, बाह्य दिखावे से नहीं।
Q5. 'मोको कहाँ ढूंढे, बंदे मैं तो तेरे पास में' प्रस्तुत पंक्ति उद्भुत है
Answer: (C) कबीर के पद से
व्याख्या: यह प्रसिद्ध पंक्ति कबीर के पद से है जो बताती है कि ईश्वर हर जगह है, मंदिर-मस्जिद में नहीं बल्कि हमारे अंदर।
Answer: (C) कबीर के पद से
व्याख्या: यह प्रसिद्ध पंक्ति कबीर के पद से है जो बताती है कि ईश्वर हर जगह है, मंदिर-मस्जिद में नहीं बल्कि हमारे अंदर।
Q6. 'मैं कहता हाँ आंखिन देखी, तू कहता कागद की लेखी' पंक्ति
Answer: (A) 'कबीर के पद' से
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है। कबीर कहते हैं कि मैं अनुभव (आँखों देखा) की बात करता हूँ, तुम किताबी ज्ञान की।
Answer: (A) 'कबीर के पद' से
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है। कबीर कहते हैं कि मैं अनुभव (आँखों देखा) की बात करता हूँ, तुम किताबी ज्ञान की।
Q7. 'कागद' का अर्थ है
Answer: (D) कागज
व्याख्या: 'कागद' का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी या लिखित ज्ञान।
Answer: (D) कागज
व्याख्या: 'कागद' का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी या लिखित ज्ञान।
Q8. कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति क्या है?
Answer: (A) मानव सेवा
व्याख्या: कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति बाह्य आडंबरों में नहीं, बल्कि मानव सेवा और निर्मल हृदय में है।
Answer: (A) मानव सेवा
व्याख्या: कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति बाह्य आडंबरों में नहीं, बल्कि मानव सेवा और निर्मल हृदय में है।
Q9. 'कबीर के पद' शीर्षक पाठ किसकी रचना है?
Answer: (B) कबीरदास
व्याख्या: यह संत कबीरदास की रचना है। कबीर भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं।
Answer: (B) कबीरदास
व्याख्या: यह संत कबीरदास की रचना है। कबीर भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं।
Q10. कबीर किस काल के कवि है?
Answer: (B) भक्तिकाल
व्याख्या: कबीर भक्तिकाल (14वीं-15वीं सदी) के प्रमुख संत कवि हैं।
Answer: (B) भक्तिकाल
व्याख्या: कबीर भक्तिकाल (14वीं-15वीं सदी) के प्रमुख संत कवि हैं।
Q11. कबीर की भाषा कैसी है?
Answer: (D) सधुक्कड़ी
व्याख्या: कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' है - हिंदी, अवधी, ब्रज, पंजाबी आदि भाषाओं का मिश्रण।
Answer: (D) सधुक्कड़ी
व्याख्या: कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' है - हिंदी, अवधी, ब्रज, पंजाबी आदि भाषाओं का मिश्रण।
Q12. कबीर कैसे संत थे?
Answer: (B) निर्गुणवादी
व्याख्या: कबीर निर्गुणवादी संत थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे, मूर्ति पूजा के विरोधी थे।
Answer: (B) निर्गुणवादी
व्याख्या: कबीर निर्गुणवादी संत थे जो निराकार ब्रह्म की उपासना करते थे, मूर्ति पूजा के विरोधी थे।
Q13. 'मोको' शब्द का अर्थ है
Answer: (C) परम पिता
व्याख्या: 'मोको' का अर्थ है 'मुझको' या 'मुझे'। यह कबीर की बोलचाल की भाषा है।
Answer: (C) परम पिता
व्याख्या: 'मोको' का अर्थ है 'मुझको' या 'मुझे'। यह कबीर की बोलचाल की भाषा है।
Q14. इनमें कौन निर्गुण भक्ति धारा के कवि हैं?
Answer: (D) जायसी
व्याख्या: मलिक मुहम्मद जायसी निर्गुण भक्ति धारा (सूफी शाखा) के कवि हैं। तुलसी और सूर सगुण भक्ति के हैं।
Answer: (D) जायसी
व्याख्या: मलिक मुहम्मद जायसी निर्गुण भक्ति धारा (सूफी शाखा) के कवि हैं। तुलसी और सूर सगुण भक्ति के हैं।
Q15. कबीर के पदों की महत्ता तत्कालीन समय से जुड़ता है बल्कि उनका उपादेयता यथावत है ---
Answer: (C) मध्यकाल में भी
व्याख्या: कबीर के पदों की प्रासंगिकता आज भी समकालीन समय में उतनी ही है। उनके विचार कालजयी हैं।
Answer: (C) मध्यकाल में भी
व्याख्या: कबीर के पदों की प्रासंगिकता आज भी समकालीन समय में उतनी ही है। उनके विचार कालजयी हैं।
Q16. ईश्वर या अल्लाह को बाहर ढूंढने की जगह उसका अपने भीतर ही साक्षात्कार की बात किसने की है?
Answer: (B) कबीरदास ने
व्याख्या: कबीरदास ने कहा कि ईश्वर को मंदिर-मस्जिद में नहीं, अपने भीतर (हृदय में) खोजो। 'मोको कहाँ ढूंढे बंदे'।
Answer: (B) कबीरदास ने
व्याख्या: कबीरदास ने कहा कि ईश्वर को मंदिर-मस्जिद में नहीं, अपने भीतर (हृदय में) खोजो। 'मोको कहाँ ढूंढे बंदे'।
Q17. जिसमें ईश्वर के निराकार रूप की आराधना की जाती है उसे कहते है
Answer: (A) निर्गुण भक्तिधारा
व्याख्या: निर्गुण भक्ति धारा में निराकार ब्रह्म की आराधना होती है। कबीर इसी धारा के प्रमुख कवि हैं।
Answer: (A) निर्गुण भक्तिधारा
व्याख्या: निर्गुण भक्ति धारा में निराकार ब्रह्म की आराधना होती है। कबीर इसी धारा के प्रमुख कवि हैं।
Q18. कबीर के पहले पद में किनके विचारों का खंडन किया गया है
Answer: (B) वेशभूषा का
व्याख्या: कबीर ने पहले पद में रूढ़िवादी विचारों, बाह्य आडंबरों और धार्मिक पाखंड का खंडन किया है।
Answer: (B) वेशभूषा का
व्याख्या: कबीर ने पहले पद में रूढ़िवादी विचारों, बाह्य आडंबरों और धार्मिक पाखंड का खंडन किया है।
Q19. कबीर ने बाह्य-आडंबरों एवं व्यर्थ अनुष्ठानों पर किया है -
Answer: (B) खूब प्रचार
व्याख्या: कबीर ने बाह्य आडंबरों, अनुष्ठानों और धार्मिक पाखंड पर करारा प्रहार किया है।
Answer: (B) खूब प्रचार
व्याख्या: कबीर ने बाह्य आडंबरों, अनुष्ठानों और धार्मिक पाखंड पर करारा प्रहार किया है।
Q20. कागद का अर्थ है -
Answer: (A) पृथ्वी
व्याख्या: 'कागद' शब्द का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी ज्ञान।
Answer: (A) पृथ्वी
व्याख्या: 'कागद' शब्द का अर्थ है कागज। 'कागद की लेखी' यानी किताबी ज्ञान।
Q21. तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे – यह पंक्ति किस कविता की है
Answer: (D) कबीर पद
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है जो ईश्वर से कहते हैं कि हमारा और तुम्हारा मन कैसे एक हो।
Answer: (D) कबीर पद
व्याख्या: यह पंक्ति कबीर के पद से है जो ईश्वर से कहते हैं कि हमारा और तुम्हारा मन कैसे एक हो।
