सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar) - विस्तृत नोट्स | A to Z Vyakaran

व्याकरण {वि + आ + करण}

सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar)

व्याकरण – वह तथ्य जिसके द्वारा हमें हिन्दी लिखना पढ़ना शुद्ध – शुद्ध आ जाए।
शब्दों का उच्चारण (pronunciation of word)

अगर आप बोर्ड परीक्षा या किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar) का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। इस लेख में हमने आपके लिए सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar) के A to Z नोट्स तैयार किए हैं।

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1. सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar): वर्ण परिचय

परिभाषा :- वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसे खंड या टुकड़े नहीं किया जा सके | जैसे – अ, इ, ख्, ग् आदि।

नोट :- हर वर्ण की एक लिपि होती है, जिसे वर्ण संकेत कहते हैं |
वर्णमाला – वर्णों के समूह को वर्णमाला कहते हैं | वर्ण दो प्रकार के होते हैं, स्वर और व्यंजन।

हिंदी भाषा में कुल 48 वर्ण हैं | जो कुछ इस प्रकार विभाजित हैं | इसके दो प्रकार हैं:

(i) स्वर वर्ण (vowel Letter) :- वह वर्ण जिसका उच्चारण किसी दूसरे वर्ण की सहायता के बिना किया जाता है | इसकी संख्या 11 है | अ, आ, इ, ई, उ , ऊ , ए , ऐ , ओ, औ, एवं ऋ

(ii) व्यंजन वर्ण (Consonant Letter) :- वे वर्ण जिसका उच्चारण स्वर वर्णों की सहायता से होता है | इस वर्ण की कुल संख्या 37 है |

जैसे –

  • स्पर्श व्यंजन :- संख्या 25 { क वर्ग, च वर्ग, ट वर्ग, त वर्ग, प वर्ग }
  • अन्तः स्थ व्यंजन :- संख्या – 4 { य, र, ल, व }
  • उष्म व्यंजन :- संख्या – 4 { श, ष, स, ह }
  • अन्य व्यंजन :- संख्या – 2 { ड़, ढ } तथा – 2 { (ं अनुस्वार), (: विसर्ग) } इसे योगवाह भी कहा जाता है।
सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar)
📸 चित्र: वर्णों के उच्चारण स्थान

वर्णों के उचारण स्थान परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण

वर्ण (Letter)उच्चारण स्थान (Pronunciation Place)
अ, आ, क , वर्ग “ह” और विसर्ग ( : )कण्ठ
इ, ई, च वर्ग “य” और “श”तालू
ऋ, ट, वर्ग “र” और ‘ष’मूर्धा (तालू का अगला भाग )
“त” वर्ग, ‘ल’ और ‘स’दन्त
उ, ऊ, और “प” वर्गओष्ठ (होंठ)
ङ, ञ, ण, न और मनासिका (नाक )
ए, ऐकण्ठ + तालू
ओ, औकण्ठ + ओष्ठ
दन्त + ओष्ठ

2. शब्द विचार (Words)

परिभाषा :- वर्णों या ध्वनि के सार्थक मेल को ‘शब्द’ (word) कहते हैं | जैसे – सूर्यास्त, पवन, पृथ्वी आदि।

नोट :- शब्द और पद – ध्वनियों का मेल शब्द कहलाता है | जैसे - प + आ + न + ई = पानी
जब यही शब्द वाक्य में प्रयोग होगा तो उसे हम पद कहते हैं | जैसे – पानी लाओ

शब्दों के भेद या प्रकार (Type of Words)

शब्द तीन प्रकार हैं |

  1. उत्पत्ति के आधार पर : { (a) तत्सम (b) तद्भव (c) देशज (d) विदेशज }
  2. व्युत्पत्ति के आधार पर : { (i) रूढ़ (ii) यौगिक (iii) योगरूढ़ }
  3. रूपांतरण या अर्थ के आधार पर : { (i) विकारी (ii) अविकारी }

उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के भेद :-

  • a. तत्सम :- वे शब्द जो मूलतः संस्कृत भाषा से सीधे-सीधे उसी रूप में हिंदी में प्रयोग किये जाते हैं तत्सम कहलाते हैं, जैसे – अग्नि, कृष्ण, रात्रि, गज, प्रथम, राष्ट्र, भूमि इत्यादि।
  • b. तद्भव :- वे संस्कृत के शब्द जो समय के साथ परिवर्तन होकर हिंदी में प्रयुक्त किये जाते हैं, जैसे पहला, काम, माँ आदि।
  • c. देशज :- वे शब्द जो क्षेत्रीय प्रभाव के कारण हिंदी में प्रयुक्त किये जाते हैं, जैसे – खुरपा, गड़बड़, हड़बड़ाहट।
  • d. विदेशी शब्द :- हिंदी / संस्कृत भाषा को छोड़कर दूसरे देशों के भाषाओं के शब्द जो हिंदी में इस्तेमाल होते हैं, जैसे – रेलवे स्टेशन, हॉस्टल, डॉक्टर, बस, नर्स आदि।

व्युत्पत्ति / संरचना या बनावट के आधार पर :-

  • a. रूढ़ शब्द :- वे शब्द जो किसी दूसरे जिनकी उत्पत्ति अन्य शब्दों के योग से नहीं होती है अर्थात इस प्रकार के शब्द में संधि, समास, उपसर्ग तथा प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है | नल, दिन, कमल आदि।
  • b. यौगिक :- वे शब्द जो दो रूढ़ शब्दों के योग से बनते हैं, और उसे अलग-अलग करने पर उनका अपना अर्थ होता है जैसे – विद्यालय, चरणकमल आदि।
  • C. योगरूढ़ :- ऐसे यौगिक जो साधारण अर्थ छोड़ विशेष अर्थ ग्रहण करें ‘योगरूढ़’ कहलाते हैं | जैसे – पंकज (कमल), लंबोदर (गणेश जी), चक्रपाणी (विष्णु) आदि।

रूपांतरण के आधार पर :-

  • a. विकारी शब्द :- ऐसे शब्द जिनमें लिंग या वचन, काल एवं कारक के अनुसार बदलाव होता है जैसे – संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण।
  • b. अविकारी शब्द :- वे शब्द जिनके रूप नहीं बदलते हैं अविकारी शब्द कहलाते हैं | इसे अव्यय भी कहा जाता है | जैसे – क्रिया विशेषण, संबंधवाचक, समुच्चय वाचक और विस्मयादिबोधक।
नोट :- विकारी और अविकारी शब्दों के कुल आठ भेद हैं | 1. संज्ञा 2. सर्वनाम 3. विशेषण 4. क्रिया 5. क्रिया विशेषण 6. संबंधवाचक 7. समुच्चय वाचक 8. विस्मयादिबोधक

3. सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar): संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण

संज्ञा (Noun)

परिभाषा :- किसी वस्तु, स्थान, व्यक्ति या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं – हिमालय श्याम, नदी, ताजमहल, लज्जा, ठंडक आदि।

संज्ञा के भेद (Type of Noun) संज्ञा के पांच भेद हैं –

  1. i. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun) :- जिस शब्द से पूरी जाति का बोध हो – गाय, फल, शिक्षक, विद्यार्थी, पुस्तकालय, नदी, भवन, मनुष्य आदि।
  2. ii. व्यक्ति वाचक (Proper Noun) :- वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति या पदार्थ का बोध हो – हिमालय, गंगा, पटना, ताजमहल, नौशाद ब्रह्मपुत्र आदि।
  3. iii. भाववाचक (Abstract Noun) :- जिस शब्द से व्यक्ति, वस्तु के गुण, धर्म, स्वभाव आदि का बोध हो – बुढ़ापा, ईमानदारी, मिठास, महत्ता, चौड़ाई आदि।
  4. iv. समूहवाचक (Collective Noun) :- जिस शब्द से समूह अथवा समुदाय का बोध हो – वर्ग, सेना, सभा, गुच्छा, भीड़, परिवार, झुण्ड आदि।
  5. v. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun) :- वह शब्द जिस से किसी द्रव्य या धातु का बोध हो - दूध, दही, सोना, चाँदी, लोहा आदि।

सर्वनाम (Pronoun)

परिभाषा :- वे शब्द जो संज्ञा के बदले इस्तेमाल हो – मैं, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन क्या।

सर्वनाम के छह भेद हैं:

  1. 1. पुरुषवाचक :- वह शब्द जो ‘नर’ अथवा नारी के लिए इस्तेमाल हो - इसके तीन भेद हैं |
    • अ. उत्तम पुरुष – (बात करने वाला) जैसे:- मैं, मैंने, हमलोग, हमलोगों ने, मुझे, मुझको, हमलोगों को, हमें, मुझ से, हमलोगों से आदि।
    • ब. मध्यम पुरुष – (जिससे बात किया जाये) - ‘तू‘ या ‘तुम‘ तथा इनके रूप।
    • स. अन्यपुरुष – (जिसके बारे में बात किया जाए) - यह, ये, वह, आप, कोई, कुछ एवं इनके रूप जो कारक के आधार पर बनते हों।
  2. 2. निश्चय वाचक सर्वनाम :- जिस से किसी व्यक्ति या भाव का निश्चित बोध हो – यह राम | वह जा रहा है।
  3. 3. अनिश्चय वाचक सर्वनाम :- जिससे व्यक्ति या भाव निश्चित न हो – कोई अथवा कुछ।
  4. 4. संबंधवाचक :- जिससे किसी संज्ञा का संबंध जोड़ा जाये – वह कौन है जो दरवाजे पर खड़ा है? (जो, सो)
  5. 5. निजवाचक :- जिससे खुद के बारे में बोध हो – मैं।
  6. 6. प्रश्नवाचक :- जिससे प्रश्न पूछे जाने का बोध हो | कौन, क्या।

विशेषण (Adjective)

परिभाषा:- वह शब्द जो किसी संज्ञा की विशेषता बताए | जैसे – गाय काली है | ताजमहल एक खूबसूरत भवन है| रहीम एक मेहनती लड़का है |

विशेषण के चार भेद हैं:

  1. 1. गुणवाचक :- जिस से गुण, रंग, आकार, अवस्था आदि का बोध हो – अच्छा, काला, गोल, भूखे (अवस्था) बदबू आदि।
  2. 2. परिमाणवाचक :- जिस से नाप या तौल का बोध हो – थोड़ा, पूरा, 2 किलो, औसत, कुछ आदि।
  3. 3. संख्यावाचक :- जिससे गिनती की संख्या का बोध हो – चार, दस, सौ आदि।
  4. 4. सार्वनामिकवाचक :- किसी संज्ञा के पहले आने वाले सर्वनाम को – कौन विद्यार्थी? कोई पुस्तक लाओ।

क्रिया (Verb)

क्रिया (Verb) :- जिस शब्द से किसी काम के होने या करने का पता चले क्रिया कहते हैं | जैसे – वह खेलता है | मैं जाता हूँ |

क्रिया दो प्रकार के हैं | सकर्मक और अकर्मक:

  • ➢ अकर्मक क्रिया – जिन क्रियाओं को कर्म की जरूरत नहीं पडती अथवा जिन कार्यों का फल कर्ता को मिलता है अकर्मक कहते हैं | रोना, तैरना, सोना, ठहरना, दौड़ना, डरना, बैठना आदि, या राम खेलता है | बच्चा रोता है | चिड़िया उडती है |
  • ➢ सकर्मक क्रिया :- जिस क्रिया का प्रभाव कर्ता पर न पड़े बल्कि कर्म पर पड़े उसे सकर्मक कहते हैं जैसे – वह लकड़ी काटता है | सीता रोटी पकाती है | रीता खाना खा रही है |
याद रखें बनावट के आधार पर क्रिया के चार भेद हैं | प्रेरणार्थक, संयुक्त क्रिया, नामिक क्रिया, कृदंत क्रिया।

अव्यय (अविकारी शब्द)

क्रिया विशेषण परिभाषा :- जिस शब्द से किसी क्रिया की विशेषता का पता चले – राम धीरे–धीरे पढता है | क्रिया विशेषण के पाँच भेद हैं – स्थान वाचक, कालवाचक, रीति वाचक, परिमाणवाचक, प्रश्नवाचक।

संबंधवाचक परिभाषा :- वे शब्द जो वाक्य के किसी संज्ञा का किसी दूसरे संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध बतलाये – उस के बिना मेरा काम नहीं चलता | अहमद की अपेक्षा महमूद एक अच्छा आदमी है | इसके दो भेद हैं – सम्बद्ध एवं अनुबंध।

समुच्चय वाचक परिभाषा :- दो शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द | और, तथा, व, किन्तु, परन्तु, क्योंकि, ताकि आदि।

विस्मयादिबोधक परिभाषा :- जिस शब्द से किसी हर्ष, शोक, आदि का भाव प्रकट हो | हाय, दुर, आहा, ओह, अजी, छीह, अरे, हे वह आदि।

4. वाक्य (Sentence)

परिभाषा:- विचार को पूर्णतया (पूरी तरह) प्रकट (जाहिर) करने वाली एक क्रिया से जुड़े पद-समूह को वाक्य कहते हैं |

  • शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं।
  • सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला। यानी शब्दों का ऐसा समूह जिससे कोई अर्थ निकल रहा हो, वह वाक्य कहलाता है। जैसे:- रमेश पुस्तक पढ़ता है |
नोट :- हर वाक्य के दो अंग होते हैं – (i) उद्देश्य (Subject) (ii) विधेय (Predicate)

वाक्यों का वर्गीकरण

1. रचना के आधार पर
2. अर्थ के आधार पर

1. रचना के आधार पर वाक्य के भेद:- रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं:

  1. 1. सरल वाक्य: ऐसा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण: रोहन खेलता है।, मीता दौड़ती है।, आकाश भागता रहता है।, श्याम पढ़ाई करता है।
  2. 2. संयुक्त वाक्य: ऐसा वाक्य जिसमे दो या दो से अधिक उपवाक्य हो एवं सभी उपवाक्य प्रधान हों, ऐसे वाक्य को संयुक्त वाक्य कहते हैं।
    उदाहरण: वह सुबह गया और शाम को लौट आया।, दिन ढल गया और अन्धेरा बढ़ने लगा।
  3. 3. मिश्र वाक्य: ऐसे वाक्य जिनमें सरल वाक्य के साथ-साथ कोई दूसरा उपवाक्य भी हो, वे वाक्य मिश्र वाक्य कहलाते हैं। मिश्र वाक्यों की रचना एक से अधिक ऐसे साधारण वाक्यों से होती है, जिनमें एक प्रधान वाक्य होता है एवं दूसरा वाक्य आश्रित होता है।
    उदाहरण: जो औरत वहां बैठी हैं वो मेरी माँ है।, जो लड़का कमरे में बैठा है वह मेरा भाई है।

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद: अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भी होते हैं:

  • 1. विधानवाचक वाक्य { Affirmative }
  • 2. इच्छावाचक वाक्य { Negative }
  • 3. आज्ञावाचक वाक्य { Imperative }
  • 4. निषेधवाचक वाक्य
  • 5. प्रश्नवाचक वाक्य
  • 6. विस्मयादिबोधक वाक्य
  • 7. संकेतवाचक वाक्य
  • 8. संदेहवाचक वाक्य

5. कारक { Case }

कारक जो क्रिया के उत्पत्ति में मदद करता करता है उसे कारक कहते हैं | कारक के आठ भेद होते हैं:

  1. (1) कर्ता ( subject ) :- काम करने वाले को कर्ता कहते हैं | जैसे – मैं लिखता हूँ | माता भोजन बनती है।
  2. (2) कर्म ( Object ) :- वह शब्द जिस पर काम का फल पड़ता है | जैसे – राम ने रावण को मारा |
  3. (3) करण ( Source ) :- कर्ता जिस साधन से काम को पूरा करता है उसे करण कहते हैं | जैसे – राम ने चाकू से सेब काटा | माँ ने झाड़ू से आँगन की सफाई की।
  4. (4) सम्प्रदान ( Contribution) :- कर्ता जिसके लिए काम करता है उसे सम्प्रदान कहते हैं | जैसे – राम ने धर्म की रक्षा के लिए रावण को मारा |
  5. (5) अपादान ( Abrogation ) :- जिस शब्द से किसी वस्तु के अलग होने का पता चले | जैसे – पेड़ से फल टूट कर गिर गए | तेज हवा के झोके से वृक्ष की डाली टूट गई |
  6. (6) संबंध ( Relation ) :- जिस से दो शब्दों के बीच सम्बन्ध पता चले | जैसे – मैं भारत का नागरिक हूँ |
  7. (7) अधिकरण ( Locative ) :- काम जिस जगह पर हो उसे अधिकरण कहते हैं | जैसे – आलम खाट पर सो रहा है | सीता पटना में रहती थी |
  8. (8) सम्बोधन ( Exhortation ) :- वह शब्द जो पुकारने या बुलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है | जैसे – अरे श्याम, हे राम।
कारक के विभक्तियाँ (चिन्ह):
(1) कर्ता – ने, (2) कर्म – को, (3) करण – से, (4) सम्प्रदान – को, के लिए, (5) अपादान – से, (6) सम्बन्ध – का, के, की, (7) अधिकरण – में, पर, (8) संबोधन – हे, अरे, अजी, अहो

⮚ उपसर्ग ( Prefix ) :- वे शब्दांश जो किसी शब्द के पहले लगकर उस शब्द के अर्थ को बदल दे, उपसर्ग कहलाते हैं | जैसे – उप+कार = उपकार, वि + नाश = विनाश, अति + सुन्दर = अतिसुन्दर, अधि +कार = अधिकार, अभि + मान = अभिमान इत्यादि।

⮚ प्रत्यय ( Suffix ) :- जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में लगकर उस शब्द के अर्थ में बदलाव पैदा करे प्रत्यय कहलाते हैं | जैसे – समाज + इक = सामाजिक, मीठा + आस = मिठास, चढ़ + आव = चढ़ाव, बूढा + आपा = बुढ़ापा, लड़का + पन = लड़कपन।

6. लिंग (Gender) और काल (Tense)

लिंग (Gender)

संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव की जाति {स्त्री या पुरुष} का बोध हो उसे लिंग कहते हैं जैसे – पुरुष – बैल, बकरा, मोहन, लड़का। स्त्री – गाय, बकरी, मोहनी, लड़की।

हिन्दी व्याकरण में लिंग के दो भेद होते हैं-

  1. (1) पुल्लिंग (Masculine Gender) :- जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
    • सजीव- कुत्ता, बालक, खटमल, पिता, राजा, घोड़ा, बन्दर, हंस, बकरा, लड़का इत्यादि।
    • निर्जीव पदार्थ- मकान, फूल, नाटक, लोहा, चश्मा इत्यादि।
    • भाव- दुःख, लगाव, इत्यादि।
  2. (2) स्त्रीलिंग (Feminine Gender) :- जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
    • सजीव- माता, रानी, घोड़ी, कुतिया, बंदरिया, हंसिनी, लड़की, बकरी, जूँ।
    • निर्जीव पदार्थ- सूई, कुर्सी, गर्दन इत्यादि।
    • भाव- लज्जा, बनावट इत्यादि।

क्रिया ( Verb ) / काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उसे 'काल' कहते हैं। दूसरे शब्दों में- क्रिया के उस रूपान्तर को काल कहते हैं, जिससे उसके कार्य-व्यापार का समय और उसकी पूर्ण अथवा अपूर्ण अवस्था का बोध हो।

जैसे-
(1) बच्चे खेल रहे हैं। मैडम पढ़ा रही हैं।
(2) बच्चे खेल रहे थे। मैडम पढ़ा रही थीं।
(3) बच्चे खेलेंगे। मैडम पढ़ायेंगी।
पहले वाक्य में क्रिया वर्तमान समय में हो रही है। दूसरे वाक्य में क्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी थी तथा तीसरे वाक्य की क्रिया आने वाले समय में होगी। इन वाक्यों की क्रियाओं से कार्य के होने का समय प्रकट हो रहा है।

काल के भेद- काल के तीन भेद होते हैं-

  1. (1) वर्तमान काल (Present Tense) - जो समय चल रहा है। क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में चल रहे समय का बोध होता है, उसे वर्तमान काल कहते हैं। जैसे- पिता जी समाचार सुन रहे हैं। पुजारी पूजा कर रहा है। प्रियंका स्कूल जाती हैं।
  2. (2) भूतकाल (Past Tense) - जो समय बीत चुका है। क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का बोध होता है, उसे भूतकाल कहते हैं। सरल शब्दों में- जिससे क्रिया से कार्य की समाप्ति का बोध हो, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं। जैसे- वह खा चुका था; राम ने अपना पाठ याद किया; मैंने पुस्तक पढ़ ली थी। उपर्युक्त सभी वाक्य बीते हुए समय में क्रिया के होने का बोध करा रहे हैं। अतः ये भूतकाल के वाक्य हैं। भूतकाल को पहचानने के लिए वाक्य के अन्त में 'था, थे, थी' आदि आते हैं।
  3. (3) भविष्यत काल (Future Tense) - जो समय आने वाला है। भविष्य में होने वाली क्रिया को भविष्यतकाल की क्रिया कहते हैं। दूसरे शब्दो में- क्रिया के जिस रूप से काम का आने वाले समय में करना या होना प्रकट हो, उसे भविष्यतकाल कहते हैं। जैसे- वह कल घर जाएगा। हम सर्कस देखने जायेंगे। किसान खेत में बीज बोयेगा। उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ से पता चलता है कि ये सब कार्य आने वाले समय में पूरे होंगे। अतः ये भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं। भविष्यत काल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में 'गा, गी, गे' आदि आते हैं।

7. सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar): संधि विच्छेद

संधि की परिभाषा:
● संधि का अर्थ होता है मेल या फिर मिलना। जब हम दो शब्दों को मिलाते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनी एवं दूसरे शब्द कि पहली ध्वनी मिलकर जो परिवर्तन लाती है, उसे ही संधि कहते हैं।
● जब संधि किये गए दो शब्दों को हम अलग अलग करके लिखते हैं तो वह संधि विच्छेद कहलाता है।

संधि के कुछ उदाहरण:- तथास्तु : तथा + अस्तु | पदोन्नति : पद + उन्नति, सर्वोच्च : सर्व + उच्च, चिरायु : चिर + आयु।

संधि के भेद : संधि के मुख्यत: तीन भेद होते हैं :
1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि

1. स्वर संधि

जब दो स्वर आपस में जुड़ते हैं या दो स्वरों के मिलने से उनमें जो परिवर्तन आता है, तो वह स्वर संधि कहलाती है। जैसे :
● विद्यालय = विद्या + आलय
इस उदाहरण में आप देख सकते है कि जब दो स्वरों को मिलाया गया तो मुख्य शब्द में हमें अंतर देखने को मिला। दो आ मिले एवं उनमे से एक आ का लोप हो गया।

स्वर संधि के भेद:

  1. 1. दीर्घ संधि: संधि करते समय अगर (अ, अ) के साथ (अ, आ) हो तो ‘आ’ बनता है, जब (इ, ई) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ई’ बनता है, जब (उ, ऊ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ऊ’ बनता है। जब ऐसा होता है तो हम इसे दीर्घ संधि कहते हैं।
  2. 2. गुण संधि: जब संधि करते समय (अ, आ) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ए’ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ओ’ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (ऋ) हो तो ‘अर’ बनता है तो यह गुण संधि कहलाती है।
  3. 3. वृद्धि संधि: जब संधि करते समय जब अ, आ के साथ ए, ऐ हो तो ‘ऐ’ बनता है और जब अ, आ के साथ ओ, औ हो तो ‘औ’ बनता है उसे वृद्धि संधि कहते हैं।
  4. 4. यण संधि: जब संधि करते समय इ, ई के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘य’ बन जाता है, जब उ, ऊ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘व्’ बन जाता है, जब ऋ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘र’ बन जाता है।
  5. 5. अयादि संधि: जब संधि करते समय ए, ऐ, ओ, औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो (ए का अय), (ऐ का आय), (ओ का अव), (औ – आव) बन जाता है। यही अयादि संधि कहलाती है।

2. व्यंजन संधि

जब संधि करते समय व्यंजन के साथ स्वर या कोई व्यंजन के मिलने से जो रूप में परिवर्तन होता है, उसे ही व्यंजन संधि कहते हैं।
उदाहरण :
● दिक् + अम्बर = दिगम्बर
● अभी + सेक = अभिषेक
● दिक् + गज = दिग्गज
● जगत + ईश = जगदीश

3. विसर्ग संधि

जब संधि करते समय विसर्ग के बाद स्वर या व्यंजन वर्ण के आने से जो विकार उत्पन्न होता है, हम उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
उदाहरण:
● अंतः + करण = अन्तकरण
● अंतः + गत = अंतर्गत
● अंतः + ध्यान = अंतर्ध्यान
● अंतः + राष्ट्रीय = अंतर्राष्ट्रीय

8. सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar): समास

समास की परिभाषा:
समास का मतलब है संक्षिप्तीकरण। दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया एवं सार्थक शब्द की रचना करते हैं। यह नया शब्द ही समास कहलाता है। यानी कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ को प्रकट किया जा सके वही समास होता है।

जैसे: समास के उदाहरण :
1. कमल के सामान चरण : चरणकमल
2. रसोई के लिए घर : रसोईघर
3. घोड़े पर सवार : घुड़सवार
4. देश का भक्त : देशभक्त
5. राजा का पुत्र : राजपुत्र आदि।

सामासिक शब्द या समस्तपद : जो शब्द समास के नियमों से बनता है वह सामासिक शब्द या समस्तपद कहलाता है।
पूर्वपद एवं उत्तरपद : सामासिक शब्द के पहले पद को पूर्व पद कहते हैं एवं दुसरे या आखिरी पद को उत्तर पद कहते हैं।

समास के भेद

समास के छः भेद होते हैं :
1. तत्पुरुष समास
2. अव्ययीभाव समास
3. कर्मधारय समास
4. द्विगु समास
5. द्वंद्व समास
6. बहुव्रीहि समास

  1. 1. तत्पुरुष समास : जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है एवं पूर्वपद गौण होता है वह समास तत्पुरुष समास कहलाता है। जैसे: ● धर्म का ग्रन्थ : धर्मग्रन्थ ● राजा का कुमार : राजकुमार ● तुलसीदासकृत : तुलसीदास द्वारा कृत।
    तत्पुरुष समास के प्रकार :
    1. कर्म तत्पुरुष : ‘को’ के लोप से यह समास बनता है। जैसे: ग्रंथकार : ग्रन्थ को लिखने वाला
    2. करण तत्पुरुष : ‘से’ और ‘के द्वारा’ के लोप से यह समास बनता है। जैसे: वाल्मिकिरचित : वाल्मीकि के द्वारा रचित
    3. सम्प्रदान तत्पुरुष : ‘के लिए’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: सत्याग्रह : सत्य के लिए आग्रह
    4. अपादान तत्पुरुष : ‘से’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: पथभ्रष्ट: पथ से भ्रष्ट
    5. सम्बन्ध तत्पुरुष : ‘का’, ‘के’, ‘की’ आदि का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: राजसभा : राजा की सभा
    6. अधिकरण तत्पुरुष : ‘में’ और ‘पर’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: जलसमाधि : जल में समाधि
  2. 2. अव्ययीभाव समास : वह समास जिसका पहला पद अव्यय हो एवं उसके संयोग से समस्तपद भी अव्यय बन जाए, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। अव्ययीभाव समास में पूर्वपद प्रधान होता है।
    अव्यय : जिन शब्दों पर लिंग, कारक, काल आदि शब्दों से भी कोई प्रभाव न हो जो अपरिवर्तित रहें वे शब्द अव्यय कहलाते हैं। अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर, आदि आते हैं। जैसे:
    ● आजन्म: जन्म से लेकर
    ● यथामति : मति के अनुसार
    ● प्रतिदिन : दिन-दिन
    ● यथाशक्ति : शक्ति के अनुसार आदि।
  3. 3. कर्मधारय समास : वह समास जिसका पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है, अथवा एक पद उपमान एवं दूसरा उपमेय होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। कर्मधारय समास का विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच में ‘है जो’ या ‘के सामान’ आते हैं। जैसे:
    ● महादेव : महान है जो देव
    ● दुरात्मा : बुरी है जो आत्मा
    ● करकमल : कमल के सामान कर
    ● नरसिंह : सिंह रुपी नर
    ● चंद्रमुख : चन्द्र के सामान मुख आदि।
  4. 4. द्विगु समास : वह समास जिसका पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण होता है तथा समस्तपद समाहार या समूह का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे:
    ● दोपहर : दो पहरों का समाहार
    ● शताब्दी : सौ सालों का समूह
    ● पंचतंत्र : पांच तंत्रों का समाहार
    ● सप्ताह : सात दिनों का समूह
  5. 5. द्वंद्व समास : जिस समस्त पद में दोनों पद प्रधान हों एवं दोनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, या ‘एवं ‘ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है। जैसे:
    ● अन्न-जल : अन्न और जल
    ● अपना-पराया : अपना और पराया
    ● राजा-रंक : राजा और रंक
    ● देश-विदेश : देश और विदेश आदि।
  6. 6. बहुव्रीहि समास : जिस समास के समस्तपदों में से कोई भी पद प्रधान नहीं हो एवं दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं वह समास बहुव्रीहि समास कहलाता है। जैसे:
    ● गजानन : गज से आनन वाला
    ● त्रिलोचन : तीन आँखों वाला
    ● दशानन : दस हैं आनन जिसके
    ● चतुर्भुज : चार हैं भुजाएं जिसकी
    ● मुरलीधर : मुरली धारण करने वाला आद
🔥 याद रखने के आसान उपाय : - अतकदिदूब
अ = अव्ययी भाव
त = तत्पुरुष
क = कर्मधारय
दि = द्विगु
दू = द्वंद्व
ब = बहुब्रीही

9. मुहावरे, पर्यायवाची, विलोम और विराम चिन्ह

मुहावरा: ऐसा वाक्य में जिस शब्द समूह का साधारण अर्थ न होकर विशेष अर्थ होता है उसे मुहावरा कहते हैं।
जैसे – नौ दो ग्यारह होजाना ( भाग जाना ), आस्तीन का साँप होना ( दोस्त के रूप में शत्रु )

पर्यायवाची (synonyms ) :- सामान अर्थ वाले शब्द को पर्याय वाची कहते है जैसे – आग – अग्नि , जल – पानी

विलोम या विपरीतार्थक शब्द (Antonyms ) :- किसी शब्द के उलटे अर्थ बताने वाले शब्द को विलोम कहते है | जैसे – उपर = नीचे , आकाश = पृथ्वी , सरल = कठिन , सपूत = कपूत आदि

विराम चिन्ह (नियम प्रयोग)

विराम चिन्ह :- विराम का अर्थ है ठहरना, रूकना लिखते समय विराम को प्रकट करने के लिए लगाया जाने वाला चिन्ह को ही विराम चिन्ह कहते है
उदाहरण :- सोहन मेरा भाई है | राम का भाई क्या कर रहा है ? ( |, ? ) विराम चिन्ह है

विराम चिन्ह के प्रकार →

  • अल्प विराम (Comma ) { , } :- जहाँ थोड़ी सी देर के लिए रूकना पड़े, वहाँ अल्प विराम का प्रयोग होता है। जैसे :- नदी , पहाड़ , मैदान प्राकृतिक कि भेंट है |
  • अर्द्ध विराम ( Semicolone ) [ ; ] :- जहाँ अल्प विराम के अपेक्षा कुछ अधिक देर रूकना पड़े , वहाँ अर्द्ध विराम का प्रयोग होता है | जैसे :- फूल खिला ; चिड़ियाँ चहकने लगी और सूर्य उग गया |
  • उप विराम (Colon ) [ : ] :- जब किसी बात को अलग – अलग दिखाना हो तो उप – विराम लगाया जाता है | जैसे – प्रदूषण : एक अभिशाप है | पानी : जीवन दायक है |
  • पूर्ण विराम (Full Stop ) [ | ] :- वाक्य के पूरा होना पर प्रयोग होने वाला चिन्ह | जैसे – आफ़ताब मेरा मित्र है | उसने मेरा कहा नहीं माना |
  • प्रश्न चिन्ह ( Question Mark ) [ ? ] :- इसका प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए क्या जाता है | ( कब, कहाँ , क्यों कैसे आदि ) जैसे – क्या अख्तर पटना गया ? क्या सभी चमकती चीज सोना हो सकती है ?
  • विस्मया बोधक चिन्ह :- [ Mark of Exclamation ] ( ! ) जैसे – हाय ! , आह ! , अरे ! आदि
  • निदेशक चिन्ह – (Dash) [ − ] इसका उपयोग विषय , विवाद , संबंध , प्रत्येक शीर्षक के आगे और उदहारण देते समय किया जाता है | इसे रेखा चिन्ह भी कहा जाता है | जैसे – मोहन बोला – राम दयालु है
  • कोष्ट चिन्ह ( Bracket ) :- ( ) , { }, [ ] – किसी शब्द का अर्थ लिखने पर प्रयोग किया जाता है जैसे – आँख का तारा होना ( प्यारा ) , ओला ( बर्फ ) गिरने से फसल बर्बाद हो गई |
  • उध्दरण चिन्ह (Inverted Comma ) [ “ ” , ‘ ‘ ]:- किसी कही गई बात को ज्यों का त्यों बताने के लिए और शीर्षक को लिखने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है | जैसे – ‘ कर्मवीर ‘ कैसी विधा है शिक्षक ने कहा , “ पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है ” |
  • योजक चिन्ह ( − ) : - इसका उपयोग एक जैसे शब्द और उल्टा शब्द या शब्दों को जोड़ने के लिए किया जाता है | जैसे – माता – पिता , भाई – बहन , धीरे – धीरे
  • लाघव चिन्ह ( sign of Abbreviation ) [ 0 ] :- किसी बड़े शब्दों को संक्षेप में लिखने के लिए इसका प्रयोग होता है | उत्तर प्रदेश – उ०प्र० , डाक्टर – डा०
  • विवरण चिन्ह (sign of following ) [∶ − ] इसका प्रयोग वाक्यांशों के विषय में जानकारी देने के लिए किया जाता है | जैसी – प्रदूषण के कारण : - , वनों के लाभ :-
  • विस्मरण चिन्ह (sign of forget ) [ ^ ] :- इसका उपयोग लिखते समय किसी शब्द के भूल जाने पर दो शब्दों के उपर किया जाता है | जैसे – हमें प्रतिदिन स्नान ^ करना चाहिए |
  • पदलोप चिन्ह (sign of Ellipsis ) [ ...............] :- इसका प्रयोग अपूर्ण वाक्यों के लिए किया जाता है जैसे – मैं तुम्हारे साथ चलता पर -----------|

निष्कर्ष

हमें उम्मीद है कि सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (Complete Hindi Grammar) का यह विस्तृत लेख आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। इसमें हमने आपके PDF का पूरा का पूरा कंटेंट ज्यों का त्यों शामिल किया है।

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