Best परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective: Ultimate Success Guide

परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective
Best परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective: Ultimate Success Guide 🧬
परिवहन  एवं पाचन  Class 10 Biology Subjective

🚀 Download Full Success PDF

परिवहन एवं पाचन Class 10 Biology Subjective के सभी विस्तृत उत्तरों की पूर्ण PDF यहाँ से प्राप्त करें।

Download PDF Now 📥

🧪 भाग - 1:परिवहन(परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective)

विस्तृत लघु उत्तरीय प्रश्न 📝

1.परिवहन तंत्र क्या है? परिवहन क्या है ?
उत्तर: शरीर में भोजन, ऑक्सीजन, हार्मोन तथा अपशिष्ट पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने वाली व्यवस्था को परिवहन तंत्र कहते हैं। उदाहरण: रक्त द्वारा ऑक्सीजन का फेफड़ों से शरीर तक पहुँचना ।
उपयोगी पदार्थों का उनके मूल स्रोतों से शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाने तथा अनुपयोगी और हनी करक पदार्थों को कोशिकाओं से निकलकर गंतव्य स्थान तक पहुँचाने की क्रिया को पदार्थों का परिवहन (Transport of meterials) कहते हैं |
2.रक्त क्या है ? इसके संघटक का व कार्य को लिखो |
उत्तर: रक्त एक लाल रंगका एक गाढ़ा क्षारीय तरल संयोजी (connective)ऊतक है जिसका PH = 7.4 होता है शरीर में विभिन्न पदार्थों का परिवहन करता है
रक्त के संघटक और उसके कार्य :-
(i) लाल रक्त कणिका(RBC) :- यह ओक्सीजन और कार्बनडाई ऑक्साइड को ले जाने का कार्य करता है
(ii)श्वेत रक्त कोशिका (W.B.C) :- हानिकारक जीवाणु को मारता है
(III) पटिकाणु :- रक्त का थक्का जमाती है |
(IV) प्लाज्मा:- इसमें रक्त के बिभिन संघटक तैरते रहते हैं |
3. लसिका क्या है
उत्तर :- लसिका एक तरल संयोजी उत्तक है जो कि हलके पीले रंग का एक रंगहीन द्रव है|जब रक्त बहुत पतली केशिकाओं (Capillaries) से होकर बहता है, तो रक्त का कुछ तरल भाग (प्लाज्मा, प्रोटीन और श्वेत रक्त कणिकाएं - WBC) रिसकर (छनकर) ऊतकों की कोशिकाओं के बीच के खाली स्थानों में आ जाता है। इसी हल्के पीले रंग के पारदर्शक तरल पदार्थ को लसिका (Lymph) या 'ऊतक द्रव' (Tissue Fluid) कहते हैं।
4. लसिका के कार्य को लिखें
उत्तर :- लसिका के प्रमुख कार्य (Functions of Lymph):-
(i) रोगों से रक्षा (Immunity): लसिका में मौजूद विशेष श्वेत रक्त कणिकाएँ (Lymphocytes) शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) को नष्ट कर देती हैं और हमें बीमारियों से बचाती हैं।
(ii) पची हुई वसा का परिवहन: छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) में पचे हुए वसा (Fat) का अवशोषण रक्त की नसों द्वारा नहीं होता, बल्कि यह काम लसिका वाहिकाओं द्वारा ही किया जाता है।
(iii) तरल का संतुलन: कोशिकाओं के बीच जो अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है, लसिका उसे वापस खींचकर शिराओं के माध्यम से फिर से रक्त (Blood) में मिला देता है।
5. रक्त के जमने में पट्टिकाणु का क्या भूमिका है
उत्तर :-
रक्त का थक्का ज़माने में पट्टिकाणु अहम भूमिका निभाती है यह अक्रियाशील प्रोथ्रोम्बिन को क्रियाशील थ्रोम्बिन में बदलती है |
6. पौधे में गैसों का आदान प्रदान कैसे होता है |
उत्तर :-
पौधों मे गैसों का आदान-प्रदान विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है।
पौधों के निम्नलिखित तीन मुख्य भागों द्वारा गैसों का आदान - प्रदान (Exchange) होता है
(i) पत्तियों के स्टोमेटा द्वारा (ii)तनो में पाए जाने वाले वातरंध्र द्वारा (iii) जड़ो के मूल रोम द्वारा
7.मानव में परिवहन तंत्र के कौन -कौन से घटक हैं ? किन्ही दो घटकों के नाम लिखें |
उत्तर
मानव में परिवहन के दो तरल संयोगी उत्तक है लसिका और रक्त यह दोनों मिलकर आक्सीजन और कार्बनडाई आक्साइड का संवहन या परिवहन करता है
8. पौधों के परिवहन उत्तक का नाम एवं कार्य लिखें
उत्तर-
पौधों के दो जटिल परिवहन उत्तक है जाइलम और फ्लोएम
(i) जाइलम :- जाइलम पौधों में जल एवं खनिज लवणों का परिवहन जड़ से पत्ती की ओर करता है।
(ii) फ्लोएम:- ये खाद्ध पदार्थों का परिवहन पौधों सम्पूर्ण भाग जैसे जड़ , तना ,पत्ती में करता है |
9. जाइलम और फ्लोएम में अंतर स्पष्ट करें |
उत्तर -
जईलम और फ्लोएम में निम्न अंतर है -
(i) जाइलम की कोशिका मृत होती है जबकि फ्लोएम की कोशिका जीवित होती है
(ii) जाइलम - जल का परिवहन करता है जबकि फोलोएम - खाद्ध पदार्थ का परिवहन करता है
(iii) जाइलम मेंजल का परिवहन एक ही दिशा में होती है जब्कि फोलोएम में खाद्ध पदार्थ का परिवहन चतुर्दिशीय होता है
10.धमनी और शिरा में एक अंतर लिखिए।
धमनी और शिरा में अंतर

धमनी और शिरा में अंतर

धमनी शिरा
हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाती है शरीर से हृदय की ओर रक्त लाती है
अधिकतर शुद्ध रक्त बहता है अधिकतर अशुद्ध रक्त बहता है
दीवार मोटी और लचीली होती है दीवार पतली होती है
वाल्व नहीं पाए जाते वाल्व पाए जाते हैं
रक्त का दबाव अधिक होता है रक्त का दबाव कम होता है
11. रक्तचाप (BP) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :-
धमनियों की दीवारों पर बहते हुए रक्त द्वारा डाला गया दबाव रक्तचाप (Blood Pressure – BP) कहलाता है
उदाहरण : एक स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mm Hg होता है, जहाँ
120 mm Hg = सिस्टोलिक दबाव (हृदय के संकुचन पर )
80 mm Hg = डायस्टोलिक दबाव (हृदय के शिथिलन पर)
12. मानव हृदय की संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
मानव हृदय की संरचना

मानव हृदय की संरचना का संक्षिप्त वर्णन

मानव हृदय एक मांसल (पेशीय) अंग है, जो वक्ष गुहा में फेफड़ों के बीच स्थित होता है और लगभग मुट्ठी के आकार का होता है।
हृदय चार कक्षों का बना होता है। ये कक्ष हैं— दायाँ आलिंद, दायाँ निलय, बायाँ आलिंद तथा बायाँ निलय।
आलिंद और निलय के बीच वाल्व पाए जाते हैं, जो रक्त को उल्टा बहने से रोकते है
बायाँ निलय सबसे मोटा होता है, क्योंकि यह शुद्ध रक्त को पूरे शरीर में भेजता है।
13. ह्रदय का कार्य लिखें |
हृदय के कार्य

हृदय के कार्य

1. हृदय का मुख्य कार्य रक्त को पंप करना है, जिससे शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचते हैं।
2. हृदय अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक भेजता है, जहाँ रक्त शुद्ध होता है।
3. हृदय शुद्ध रक्त को शरीर के सभी भागों तक पहुँचाता है।
4. हृदय शरीर में रक्त परिसंचरण को निरंतर बनाए रखता है।
14. उत्सर्जन की परिभाषा लिखिए | उत्सर्जन के दो प्रमुख अंग के नाम लिखें | दो उत्सर्जी पदार्थों का नाम लिखे |
उत्सर्जन

उत्सर्जन

1. उत्सर्जन की परिभाषा: शरीर में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
2. उत्सर्जन के दो प्रमुख अंग: (क) गुर्दा (Kidney) (ख) फेफड़ा (Lungs)
3. दो उत्सर्जी पदार्थ: (क) यूरिया (ख) कार्बन डाइऑक्साइड
15. वाष्पो उत्सर्जन क्रिया का पौधों के लिए क्या महत्व है
उत्तर :-
उतत्सर्जन पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके द्वारा पौधों में श्वसन एवं अन्य जैव-क्रियाओं से उत्पन्न विषैले और अनावश्यक पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इससे पौधों का आंतरिक संतुलन बना रहता है, अतिरिक्त जल एवं गैसों का निष्कासन होता है तथा पौधों की सामान्य वृद्धि और विकास संभव होता है
16. एकदिशीय एवं द्विदिशीय स्थानान्तरण में क्या महत्व है ?
उत्तर :-
✍️ एकदिशीय एवं द्विदिशीय स्थानान्तरण का महत्व
एकदिशीय स्थानान्तरण पौधों में होता है, जिसमें जल एवं खनिज लवण जड़ों से पत्तियों तक जाइलम द्वारा पहुँचाए जाते हैं। इसका महत्व यह है कि इससे पौधों को प्रकाश संश्लेषण और वृद्धि के लिए आवश्यक जल व खनिज मिलते है।
द्विदिशीय स्थानान्तरण फ्लोएम द्वारा होता है, जिसमें पत्तियों में बना भोजन पौधे के सभी भागों तक ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में पहुँचता है। इसका महत्व यह है कि इससे पौधे के सभी अंगों को ऊर्जा व पोषण मिलता है और पौधा स्वस्थ रहता है
17 . श्वेत रक्त कोशिका और लाल रक्त कोशिका से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर :-
लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC) शरीर में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन पाया जाता है और परिपक्व अवस्था में नाभिक नहीं होता।
श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) शरीर को रोगों से बचाने का कार्य करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नहीं होता, परंतु नाभिक उपस्थित रहता है और ये संक्रमण से लड़ती हैं।
👉 संक्षेप में: RBC का मुख्य कार्य गैसों का परिवहन है, जबकि WBC का कार्य शरीर की रक्षा करना है
18. रक्त के द्विगुण परिवहन का क्या अर्थ है?
उत्तर :-
रक्त का द्विगुण परिवहन वह प्रक्रिया है जिसमें रक्त हृदय से शरीर तक और शरीर से वापस हृदय तक दो बार होकर प्रवाहित होता है। मनुष्य में रक्त एक बार हृदय → फेफड़े → हृदय तथा दूसरी बार हृदय → शरीर के अंग → हृदय जाता है। इससे शुद्ध एवं अशुद्ध रक्त का मिश्रण नहीं होता तथा शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
19. धमनियों (Arteries) की दीवारें मोटी और लचीली क्यों होती हैं, जबकि शिराओं (Veins) में वाल्व (Valves) क्यों पाए जाते हैं? (VVI)
उत्तर:-
धमनियों की दीवारें मोटी क्यों कि धमनियों में रक्त हृदय से बहुत उच्च दबाव (High Pressure) और झटके के साथ निकलता है। इस उच्च दबाव को सहने के लिए उनकी दीवारें मोटी और लचीली होती हैं
शिराओं में वाल्व क्यो कि शिराओं में रक्त शरीर के अंगों से हृदय की ओर (कम दबाव में) वापस आता है। रक्त गुरुत्वाकर्षण के कारण वापस उल्टी दिशा में न बहने लगे, इसलिए शिराओं में जगह-जगह पर वाल्व (कपाट) पाए जाते हैं
20. मनुष्य के हृदय के बाएँ और दाएँ भाग को अलग रखने वाली विभाजिका (Septum) का क्या महत्व है?
उत्तर:-
हृदय का दायाँ भाग अशुद्ध (CO2 युक्त) रक्त प्राप्त करता है और बायाँ भाग शुद्ध (O2 युक्त) रक्त प्राप्त करता है। विभाजिका (Septum) इन दोनों प्रकार के रक्त को आपस में मिलने से रोकती है। इससे शरीर की कोशिकाओं को भरपूर मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है, जो हमारे शरीर का उच्च तापमान (37°C) बनाए रखने के लिए अत्यधिक ऊर्जा (ATP) उत्पन्न करने के लिए आवश्यक है।
21. रुधिर (Blood) और लसिका (Lymph) में क्या अंतर है? (VVI)
उत्तर :-
रुधिर और लसिका में अंतर
रुधिर (Blood) लसिका (Lymph)
यह लाल रंग का होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन युक्त लाल रक्त कण (RBC) पाए जाते हैं। यह रंगहीन या हल्का पीला होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन युक्त RBC नहीं होते।
इसमें प्रोटीन तथा पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है, लेकिन श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) अधिक होती हैं।
यह हृदय से शरीर के अंगों तक तथा अंगों से वापस हृदय तक दोनों दिशाओं में बहता है। यह केवल ऊतकों से हृदय की ओर एक ही दिशा में बहता है।

✦ 📘 परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective: Ultimate Success Guide

✦ 📘 भाग – 2 : पाचन (लघु उत्तरीय प्रश्न)

22. पाचन क्रिया क्या है?
उत्तर :-
वह प्रक्रिया जिसमें जटिल और अघुलनशील खाद्य पदार्थों को एंजाइमों की सहायता से सरल और घुलनशील पदार्थों में तोड़ा जाता है, ताकि शरीर उन्हें आसानी से सोख सके या अवशोषण कर सके, पाचन (Digestion) कहलाती है
23. पाचन की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर :-
शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्राप्त करने, नई कोशिकाओं के निर्माण और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। चूँकि कोशिकाएँ जटिल भोजन को सीधे ग्रहण नहीं कर सकतीं, इसलिए उसे सरल रूप में बदलने (पचाने) की आवश्यकता होती है।
24. पाचन तंत्र क्या है?
उत्तर : -
मानव शरीर में भोजन को पचाने, अवशोषित करने और अपचे पदार्थों को बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार अंगों के पूरे समूह को पाचन तंत्र (Digestive System) कहते हैं। इसमें आहारनाल और उससे जुड़ी पाचक ग्रंथियां शामिल होती हैं।
25. पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर:-
✍️ आहारनाल के भाग: मुख गुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत और मलद्वार।
✍️ पाचक ग्रंथियां: लार ग्रंथियां, यकृत (Liver), और अग्न्याशय (Pancreas)।
26. मुख में पाचन कैसे होता है?
उतर :-
मुख में दाँत भोजन को चबाकर छोटे टुकड़ों में पीसते हैं। इसके बाद लार में मौजूद 'टायलिन (एमाइलेज)' एंजाइम भोजन में मौजूद जटिल स्टार्च (कार्बोहाइड्रेट) को सरल शर्करा (माल्टोज) में बदल देता है।
27. लार (Saliva) का पाचन में क्या कार्य है?
उत्तर:-
1. यह भोजन को नम और लसदार बनाती है जिससे उसे निगलने में आसानी होती है
2. लार में मौजूद एंजाइम (एमाइलेज) कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुख से ही शुरू कर देते हैं।
28. आमाशय (Stomach) के दो कार्य लिखिए।
उत्तर:-
1. भोजन को मथकर लेई (Paste) के रूप में बदलना।
2. गैस्ट्रिक रस (HCl और पेप्सिन) का स्राव करना, जो हानिकारक जीवाणुओं को मारता है और प्रोटीन का पाचन शुरू करता है।
29. गैस्ट्रिक रस (Gastric Juice) में पाए जाने वाले मुख्य अवयवों के नाम लिखिए।
उत्तर:-
आमाशय से निकलने वाले गैस्ट्रिक रस में मुख्य रूप से तीन चीजें होती हैं:
(i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
(ii) पेप्सिन एंजाइम
(iii) श्लेष्मा (Mucus)
30. पेप्सिन एंजाइम का कार्य लिखिए।
उत्तर:-
पेप्सिन आमाशय में पाया जाने वाला एक प्रमुख पाचक एंजाइम है। यह अम्लीय माध्यम में सक्रिय होकर भोजन के प्रोटीन को तोड़कर पेप्टोन (Peptones) में बदल देता है।
31. यकृत (Liver) का पाचन में क्या महत्व है?
उत्तर:-
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस (Bile juice) का निर्माण करता है, जो आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा (Fat) के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
32. पित्त रस (Bile Juice) का कार्य लिखिए।
पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता, फिर भी यह वसा के बड़े कणों को तोड़कर छोटी-छोटी गोलिकाओं में बदल देता है। इस प्रक्रिया को 'इमल्सीकरण (Emulsification)' कहते हैं, जिससे वसा का पाचन आसान हो जाता है।
33. वसा (Fat) का पाचन कहाँ और कैसे होता है?
उत्तर:-
वसा का मुख्य पाचन छोटी आँत में होता है। पहले पित्त रस वसा का इमल्सीकरण करता है, फिर अग्न्याशय का 'लाइपेज' एंजाइम उस वसा को तोड़कर वसीय अम्ल (Fatty acid) और ग्लिसरॉल में बदल देता है।
34. अवशोषण (Absorption) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:-
भोजन पाचन के बाद बने सरल और घुलनशील पोषक तत्वों (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) का छोटी आँत की दीवार से होकर रक्त (Blood) या लसिका (Lymph) में मिलने की प्रक्रिया को अवशोषण कहते हैं।
35. अवशोषण और स्वांगीकरण (Assimilation) में अंतर लिखिए।
उत्तर :-
अवशोषण और स्वांगीकरण में अंतर अवशोषण और स्वांगीकरण में अंतर
अवशोषण स्वांगीकरण (Assimilation)
पाचन के बाद बने सरल एवं घुलनशील पोषक तत्वों का छोटी आंत की दीवारों से होकर रक्त या लसिका में प्रवेश करना अवशोषण कहलाता है। रक्त द्वारा लाए गए पोषक तत्वों का शरीर की कोशिकाओं में उपयोग होकर ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि एवं ऊतकों के निर्माण में लगना स्वांगीकरण कहलाता है।
अवशोषण की क्रिया मुख्य रूप से छोटी आंत में होती है। स्वांगीकरण की क्रिया शरीर की सभी जीवित कोशिकाओं में होती है।
36. विल्ली (Villi) या दीर्घरोम क्या है? इसका कार्य लिखिए।
उत्तर: -
छोटी आँत की भीतरी दीवार पर असंख्य उंगली जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें दीर्घरोम या विल्ली कहते हैं।
कार्य: ये पचे हुए भोजन के अवशोषण के लिए सतही क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ा देते हैं, जिससे भोजन जल्दी और अधिक मात्रा में रक्त में मिल सके।
37. बड़ी आँत (Large Intestine) का कार्य लिखिए।
उत्तर:-
छोटी आँत से अपचा भोजन बड़ी आँत में आता है। बड़ी आँत का मुख्य कार्य इस अपचे भोजन में से अतिरिक्त जल (पानी) का अवशोषण करना है और बचे हुए ठोस अपशिष्ट पदार्थ को मलाशय की ओर धकेलना है।
38. मल त्याग (Egestion / बहिष्क्षेपण) क्या है?
उत्तर: -
पाचन और अवशोषण के बाद बचे हुए अपचे, व्यर्थ और ठोस मल पदार्थों (Feces) को गुदा (Anus) या मलद्वार के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को मल त्याग या बहिष्क्षेपण कहते हैं।
39. पाचन और श्वसन में एक अंतर लिखिए।
उत्तर :-
पाचन एवंश्वसन में अंतर
पाचन और श्वसन में अंतर
पाचन श्वसन
पाचन वह प्रक्रिया है जिसमें जटिल भोजन को सरल, घुलनशील और अवशोषण योग्य पदार्थों में बदला जाता है। यह प्रक्रिया मुख, आमाशय और छोटी आंत में होती है। श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें भोजन का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह प्रक्रिया कोशिकाओं में होती है।
पाचन में एंजाइमों की सहायता से भोजन का रासायनिक अपघटन किया जाता है। श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग करके ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनता है।
40.शाकाहारी जंतुओं की छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) मांसाहारी जंतुओं की तुलना में लंबी क्यों होती है? (VVI)
उत्तर :-
शाकाहारी जंतु मुख्य रूप से घास या पेड़-पौधे खाते हैं, जिनमें सेल्यूलोज (Cellulose) भरपूर मात्रा में होता है। सेल्यूलोज को पचने में बहुत अधिक समय लगता है। इसलिए, सेल्यूलोज के पूर्ण पाचन के लिए शाकाहारी जंतुओं (जैसे- गाय, हिरण) की छोटी आंत लंबी होती है। इसके विपरीत, मांस आसानी से पच जाता है, इसलिए मांसाहारी जंतुओं (जैसे- बाघ, शेर) की छोटी आंत अपेक्षाकृत छोटी होती है।
41. यदि आमाशय (Stomach) में श्लेष्मा (Mucus) का स्राव न हो, तो क्या होगा?
उत्तर:-
आमाशय की भीतरी दीवार से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है, जो बहुत ही शक्तिशाली और संक्षारक (Corrosive) होता है। श्लेष्मा (Mucus) इस अम्ल से आमाशय की दीवारों की रक्षा करता है। यदि श्लेष्मा का स्राव न हो, तो यह अम्ल आमाशय की आंतरिक परत को जला देगा और घाव कर देगा, जिसे 'अल्सर (पेप्टिक अल्सर)' कहते हैं।

✦ 📘 परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective: Ultimate Success Guide

✦ 📘 भाग – 1 : परिवहन (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

1. मानव हृदय की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :-
भूमिका:
मानव हृदय एक पेशीय (Muscular) अंग है जो मुट्ठी के आकार का होता है। यह वक्ष गुहा में दोनों फेफड़ों के बीच थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है। यह शरीर का मुख्य पंपिंग अंग है।
संरचना:
चार कक्ष (Chambers): हृदय चार कक्षों में बंटा होता है। ऊपर के दो कक्षों को 'दायाँ आलिंद' और 'बायाँ आलिंद' कहते हैं। नीचे के दो कक्षों को 'दायाँ निलय' और 'बायाँ निलय' कहते हैं।
विभाजिका (Septum):
यह हृदय को दाएँ और बाएँ भाग में बांटती है ताकि शुद्ध (O2 युक्त) और अशुद्ध (CO2 युक्त) रक्त आपस में न मिलें।
वाल्व (Valves):
आलिंद और निलय के बीच वाल्व होते हैं जो रक्त को केवल एक ही दिशा में बहने देते हैं (पीछे लौटने से रोकते हैं)।
कार्य:
अशुद्ध रक्त का प्रवाह: शरीर के अंगों से अशुद्ध रक्त महाशिरा द्वारा दाएँ आलिंद में आता है। यहाँ से यह दाएँ निलय में जाता है और फिर फेफड़ों में शुद्ध होने (ऑक्सीजन लेने) के लिए भेज दिया जाता है।
शुद्ध रक्त का प्रवाह : फेफड़ों से शुद्ध रक्त बाएँ आलिंद में आता है। फिर यह बाएँ निलय में जाता है। बायाँ निलय सबसे मजबूत होता है, जो इस शुद्ध रक्त को 'महाधमनी (Aorta)' के जरिए पूरे शरीर में पंप कर देता है।
नामांकित चित्र : मानव हृदय

मानव हृदय का नामांकित चित्र
2. रक्त के अवयवों के नाम लिखकर उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :-
रक्त (Blood):-
यह एक तरल संयोजी ऊतक है। इसके मुख्य रूप से दो भाग और चार अवयव होते हैं:
1. प्लाज्मा (Plasma):-
यह रक्त का हल्के पीले रंग का तरल भाग है (लगभग 55%)।
कार्य: यह पचे हुए भोजन, हार्मोन, कार्बन डाइऑक्साइड और यूरिया (अपशिष्ट) का शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन करता है।
2. लाल रक्त कणिकाएं (RBC):
इनमें हीमोग्लोबिन नामक लाल वर्णक होता है।
कार्य:
फेफड़ों से ऑक्सीजन को लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाना।
3. श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC):
इन्हें शरीर का सैनिक कहा जाता है।
कार्य:
बाहर से शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) और वायरस को नष्ट करना और बीमारियों से बचाना।
4. प्लेटलेट्स (Platelets:)
कार्य:
शरीर के किसी भाग के कटने या छिलने पर यह रक्त का थक्का (Blood Clot) बना देती हैं, जिससे खून का बहना रुक
3. दोहरे परिसंचरण (Double Circulation) की प्रक्रिया समझाइए। मनुष्य में यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर :-
दोहरा परिसंचरण :-
मनुष्य के शरीर में रक्त को एक पूर्ण चक्र पूरा करने के लिए हृदय से होकर 'दो बार' गुजरना पड़ता है। इसी प्रक्रिया को दोहरा परिसंचरण कहते हैं ।
दोहरा परिसंचरण के दो भाग है दो भाग हैं-
1. फुफ्फुसीय परिसंचरण:
दाएँ निलय से अशुद्ध रक्त का फेफड़ों में जाना और शुद्ध होकर बाएँ आलिंद में वापस आना।
दैहिक परिसंचरण:
बाएँ निलय से शुद्ध रक्त का पूरे शरीर में जाना और अशुद्ध होकर वापस दाएँ आलिंद में आना।
आवश्यकता / महत्व:
मनुष्य (और पक्षियों) को अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। दोहरा परिसंचरण शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) और अशुद्ध (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) रक्त को आपस में मिलने से रोकता है, जिससे शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन की भरपूर सप्लाई मिलती है और अधिक ऊर्जा पैदा होती है।
रक्त के दोहरे परिसंचरण तंत्र का चित्र

दोहरे परिसंचरण तंत्र
4. पौधों में जल तथा भोजन का परिवहन कैसे होता है? समझाइए।
उत्तर :-
भूमिका: पौधों में जंतुओं की तरह रक्त या हृदय जैसा कोई अंग नहीं होता, फिर भी उन्हें जड़ों से पत्तियों तक जल और पत्तियों से जड़ों तक भोजन पहुँचाने के लिए एक विशेष परिवहन तंत्र की आवश्यकता होती है। पौधों में यह कार्य दो विशिष्ट संवहन ऊतकों (Vascular tissues) द्वारा संपन्न होता है|
1.जाइलम (Xylem) - जल के परिवहन के लिए।
2.फ्लोएम (Phloem) - भोजन के परिवहन के लिए।
इन दोनों की कार्यप्रणाली निम्नलिखित है|
1. पौधों में जल तथा खनिज लवणों का परिवहन (जाइलम द्वारा )
जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित जल और खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाने का कार्य जाइलम (Xylem) ऊतक करता है। जल का परिवहन हमेशा एकदिशीय (नीचे से ऊपर की ओर) होता है। यह मुख्य रूप से दो बलों (Forces) द्वारा होता है
(A) मूल दाब (Root Pressure): रात के समय जब वाष्पोत्सर्जन नहीं होता, तब जड़ों की कोशिकाएं मिट्टी से सक्रिय रूप से आयनों (Ions) को ग्रहण करती हैं। इससे जड़ और मिट्टी के बीच आयन सांद्रता में अंतर आ जाता है, जिसे भरने के लिए जल अपने आप जड़ों में प्रवेश कर जाता है। यह एक दबाव बनाता है जो जल को तने में कुछ ऊंचाई तक धकेलता है।
(B) वाष्पोत्सर्जन कर्षण / खिंचाव (Transpiration Pull): दिन के समय जब सूर्य का प्रकाश होता है, तब पत्तियों के रंध्रों (Stomata) से जल वाष्प बनकर उड़ता रहता है। इस वाष्पोत्सर्जन के कारण जाइलम वाहिकाओं में एक चूषण बल (Suction Pull) या खिंचाव पैदा होता है। ठीक वैसे ही जैसे हम स्ट्रॉ (Straw) से जूस खींचते हैं, यह बल जल को जड़ों से खींचकर ऊंचे-ऊंचे पेड़ों की चोटी तक पहुँचा देता है। जल परिवहन में यह सबसे मुख्य बल है।
2. पौधों में भोजन का परिवहन (फ्लोएम द्वारा)
पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा तैयार किए गए भोजन (ग्लूकोज/सुक्रोज) को पौधे के सभी अंगों (जड़, तना, फल, फूल) तक पहुँचाने का कार्य फ्लोएम (Phloem) ऊतक करता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। भोजन का परिवहन द्विदिशीय (ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में) होता है। प्रक्रिया (Mechanism): जाइलम में जल का परिवहन भौतिक बलों से होता है, लेकिन फ्लोएम में भोजन के स्थानांतरण के लिए पौधे को अपनी ऊर्जा (ATP) खर्च करनी पड़ती है। पत्तियों में बना सुक्रोज (भोजन) ATP ऊर्जा का उपयोग करके फ्लोएम ऊतक में लोड किया जाता है। इससे फ्लोएम के अंदर परासरण दाब (Osmotic pressure) बढ़ जाता है और आस-पास का जल उसमें प्रवेश कर जाता है। यह उच्च दबाव भोजन को पौधे के उन भागों (जैसे जड़ या फल) तक धकेल देता है, जहाँ दबाव कम होता है और भोजन की आवश्यकता होती है।
विशेषता जल का परिवहन भोजन का परिवहन
ऊतक जाइलम (Xylem) फ्लोएम (Phloem)
प्रक्रिया का नाम वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) स्थानांतरण (Translocation)
परिवहन की दिशा केवल नीचे से ऊपर (एकदिशीय) ऊपर और नीचे दोनों ओर (द्विदिशीय)
ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता नहीं होती (भौतिक बल कार्य करते हैं) होती है (ATP ऊर्जा खर्च होती है)

✦ 📘 परिवहन और पाचन Class 10 Biology Subjective: Ultimate Success Guide

✦ 📘 भाग – 2 : पाचन (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

5. मानव शरीर में पाचन की पूरी प्रक्रिया को क्रमवार समझाइए।
उत्तर:-
भूमिका (Introduction):
मानव शरीर में जटिल और अघुलनशील खाद्य पदार्थों को एंजाइमों की सहायता से सरल, घुलनशील और अवशोषण योग्य रूप में तोड़ने की प्रक्रिया पाचन (Digestion) कहलाती है। मानव आहारनाल (Alimentary Canal) में भोजन के पाचन की प्रक्रिया निम्नलिखित क्रमानुसार संपन्न होती है|
पाचन का क्रम:
मुख गुहा ➔ ग्रासनली ➔ आमाशय ➔ छोटी आंत ➔ बड़ी आंत ➔ मलद्वार
1. मुख गुहा (Mouth) में पाचन:
पाचन की शुरुआत मुँह से ही हो जाती है। जहाँ दाँत भोजन को चबाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में पीस दिया जाता ,है इस क्रिया के दौरान लार ग्रंथियों से 'लार (Saliva)' निकलती है, जो भोजन को लसदार बना देती है।लार में मौजूद 'टायलिन या एमाइलेज (Amylase)' नामक एंजाइम भोजन में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) को सरल शर्करा (माल्टोज) में बदल देता है।
2. ग्रासनली (Oesophagus) से गुजरना
मुँह से भोजन ग्रासनली में जाता है। यहाँ पाचन की कोई क्रिया नहीं होती है। ग्रासनली की पेशियों में सिकुड़न और फैलाव होता है, जिसे क्रमाकुंचन (Peristaltic movement) कहते हैं। इसी गति के कारण भोजन नीचे आमाशय की ओर खिसकता है।
3. आमाशय (Stomach) में पाचन:
आमाशय में भोजन लगभग 3-4 घंटे तक रहता है और मथकर लेई (Paste) जैसा बन जाता है। आमाशय की जठर ग्रंथियों से 'जठर रस' स्रावित होता है, जिसमें मुख्य तीन घटक होते हैं:
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): यह भोजन को अम्लीय बनाता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है ।
पेप्सिन (Pepsin): यह अम्लीय माध्यम में सक्रिय होकर प्रोटीन का पाचन शुरू करता है।
श्लेष्मा (Mucus): यह आमाशय की आंतरिक दीवार को HCl अम्ल के प्रभाव से बचाता है।j
4. छोटी आंत (Small Intestine) में पाचन एवं अवशोषण (सबसे महत्वपूर्ण चरण):
आमाशय से अधपचा भोजन छोटी आंत में आता है। यहाँ भोजन का पूर्ण पाचन होता है। यहाँ दो प्रमुख ग्रंथियों का रस भोजन में मिलता है|
यकृत (Liver) का कार्य: यह 'पित्त रस (Bile)' स्रावित करता है। पित्त रस अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा (Fat) की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में तोड़ देता है। इस प्रक्रिया को इमल्सीकरण (Emulsification) कहते हैं।
अग्न्याशय (Pancreas) का कार्य: अग्न्याशयी रस में तीन प्रमुख एंजाइम होते हैं-
1. ट्रिप्सिन - बचे हुए प्रोटीन को पचाता है।
2. लाइपेज- इमल्सीकृत वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदलता है।
3. एमाइलेज- बचे हुए कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है।
अवशोषण (Absorption): पाचन पूरा होने के बाद, छोटी आंत की दीवारों पर मौजूद उंगली जैसी संरचनाएँ जिन्हें विल्ली या दीर्घरोम (Villi) कहते हैं, पचे हुए भोजन को सोखकर रक्त (Blood) में मिला देती हैं।
5. बड़ी आंत (Large Intestine) में क्रिया:
अंत में, जल अवशोषण के बाद बचा हुआ ठोस अपशिष्ट पदार्थ (मल) मलाशय में इकट्ठा होता है और समय-समय पर मलद्वार (गुदा) के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इसे बहिष्क्षेपण (Egestion) कहते हैं।
मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र

📸 चित्र: मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

6. यकृत (Liver) क्या है? मानव शरीर में इसके प्रमुख कार्यों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर:
भूमिका (Introduction):
यकृत (Liver) मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि (Largest Gland) है। यह उदर गुहा (Abdominal cavity) के ऊपरी दाहिने भाग में स्थित होती है। इसका वजन लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। यकृत हमारे शरीर की 'रासायनिक प्रयोगशाला (Chemical Laboratory)' कहलाता है, क्योंकि यह 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है।

मानव यकृत (Liver) और पित्ताशय का नामांकित चित्र

📸 चित्र: मानव यकृत (Liver) और पित्ताशय

यकृत (Liver) के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  • 1. पित्त रस का निर्माण (Production of Bile Juice):
    यकृत की कोशिकाएं लगातार हरे-पीले रंग का क्षारीय तरल 'पित्त रस' बनाती हैं, जो पित्ताशय (Gallbladder) में जमा होता है। यह रस आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा (Fat) की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में तोड़ता है। इस प्रक्रिया को इमल्सीकरण (Emulsification) कहते हैं, जिससे वसा का पाचन आसान हो जाता है।
  • 2. विषहरण (Detoxification):
    रक्त में मौजूद विषैले पदार्थों (जैसे शराब, दवाओं के रसायन और अमोनिया) को यकृत अवशोषित कर लेता है और उन्हें यूरिया जैसे कम हानिकारक पदार्थों में बदलकर शरीर की रक्षा करता है।
  • 3. ग्लाइकोजन का भंडारण (Storage of Glycogen):
    पाचन के बाद जब रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है, तो यकृत उसे 'ग्लाइकोजन' में बदलकर अपने अंदर स्टोर (संचित) कर लेता है। जब शरीर को ऊर्जा (जैसे उपवास के समय) की आवश्यकता होती है, तो यह वापस ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदल देता है।
  • 4. विटामिन और खनिजों का संचय:
    यह वसा में घुलनशील विटामिन— A, D, E, K और खनिजों (जैसे आयरन और कॉपर) का लंबे समय तक भंडारण करता है।
  • 5. रक्त का थक्का बनाने वाले प्रोटीन का निर्माण:
    यकृत 'फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen)' और 'प्रोथ्रोम्बिन (Prothrombin)' नामक प्रोटीन बनाता है, जो शरीर के कटने पर रक्त का थक्का (Blood Clot) जमाने में मदद करते हैं।
  • 6. हिपैरिन (Heparin) का स्राव:
    यकृत 'हिपैरिन' नामक पदार्थ भी बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं (नसों) के अंदर बहते हुए खून को जमने से रोकता है।

निष्कर्ष:
अतः, यकृत केवल पाचन में ही नहीं, बल्कि शरीर के तापमान नियंत्रण, उत्सर्जन और चयापचय (Metabolism) में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है।

7. आमाशय (Stomach) में पाचन की क्रिया का विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर:

भूमिका (Introduction):
आमाशय (Stomach) आहारनाल का सबसे चौड़ा और अंग्रेजी के 'J' आकार का एक थैलीनुमा अंग है। जब भोजन ग्रासनली (Oesophagus) से होकर आमाशय में पहुँचता है, तो यहाँ भोजन का लगभग 3 से 4 घंटे तक मंथन (Churning) और रासायनिक पाचन होता है।

मानव आमाशय (Stomach) की आंतरिक संरचना का चित्र

📸 चित्र: मानव आमाशय (Stomach) और जठर ग्रंथियां

आमाशय में पाचन की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में संपन्न होती है:

1. यांत्रिक पाचन (मंथन क्रिया):
आमाशय की मजबूत पेशियां (Muscles) लगातार सिकुड़ती और फैलती हैं। इस मंथन गति के कारण भोजन अच्छी तरह पिसकर एक गाढ़ी लेई (Paste) में बदल जाता है, जिसे 'कायम (Chyme)' कहते हैं。

2. रासायनिक पाचन (जठर रस का स्राव):
आमाशय की भीतरी दीवार (Mucosa) में लाखों सूक्ष्म जठर ग्रंथियां (Gastric Glands) पाई जाती हैं। जब भोजन आमाशय में आता है, तो ये ग्रंथियां 'जठर रस (Gastric Juice)' का स्राव करती हैं। जठर रस में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण पदार्थ होते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं:

  • (i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का कार्य:
    • यह भोजन के साथ आए हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) को नष्ट कर देता है।
    • यह भोजन को अत्यधिक अम्लीय (Acidic) बना देता है, जिससे पेप्सिनोजेन एंजाइम सक्रिय 'पेप्सिन' में बदल सके।
    • यह भोजन को सड़ने से रोकता है।
  • (ii) पेप्सिन एंजाइम (Pepsin) का कार्य:
    • यह आमाशय का मुख्य पाचक एंजाइम है।
    • यह अम्लीय माध्यम में सक्रिय होकर जटिल प्रोटीन (Protein) को तोड़कर सरल पेप्टोन (Peptones) में बदल देता है।
  • (iii) श्लेष्मा या म्यूकस (Mucus) का कार्य:
    • चूंकि HCl बहुत तेज़ अम्ल है, इसलिए श्लेष्मा आमाशय की आंतरिक परत पर एक सुरक्षात्मक आवरण बना लेता है।
    • यह आमाशय को HCl अम्ल और पेप्सिन एंजाइम के प्रभाव से बचाता है। इसके न होने पर 'पेप्टिक अल्सर' हो सकता है।

निष्कर्ष:
इन सभी क्रियाओं के बाद, आमाशय में भोजन एक अम्लीय अर्ध-तरल लेई (कायम/Chyme) बन जाता है। इसके बाद, यह भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में छोटी आंत (ग्रहणी/Duodenum) में प्रवेश कर जाता है, जहाँ इसका पूर्ण पाचन होता है。

प्रश्न 8: पाचन, अवशोषण एवं स्वांगीकरण (Assimilation) में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
पाचन, अवशोषण और स्वांगीकरण—ये तीनों मनुष्य (और अन्य जीवों) में होने वाले **प्राणिसम पोषण (Holozoic Nutrition)** के तीन क्रमबद्ध और अति-महत्वपूर्ण चरण हैं। इनमें प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

अंतर का आधार पाचन (Digestion) अवशोषण (Absorption) स्वांगीकरण (Assimilation)
1. परिभाषा जटिल और अघुलनशील खाद्य पदार्थों को एंजाइमों की मदद से सरल और घुलनशील पदार्थों में तोड़ने की क्रिया। पाचन के बाद बने सरल पोषक तत्वों का आंत की दीवार से होकर रक्त (Blood) या लसिका में प्रवेश करना। रक्त द्वारा लाए गए पोषक तत्वों का कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा प्राप्ति और वृद्धि के लिए उपयोग करना।
2. स्थान यह मुख्य रूप से मुख गुहा, आमाशय और छोटी आंत में संपन्न होता है। यह मुख्य रूप से छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) के दीर्घरोम (Villi) द्वारा होता है। यह शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका (कोशिकाद्रव्य/माइटोकॉन्ड्रिया) के अंदर होता है।
3. एंजाइम की भूमिका इसमें पाचक एंजाइमों (जैसे- पेप्सिन, एमाइलेज) का होना अत्यंत आवश्यक है। इस क्रिया में पाचक एंजाइमों की कोई आवश्यकता नहीं होती (यह विसरण द्वारा होता है)। इसमें श्वसन और जीवद्रव्य निर्माण करने वाले कोशिकीय एंजाइम कार्य करते हैं।
4. अंतिम परिणाम कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा टूटकर क्रमशः ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और वसीय अम्ल बनते हैं। पोषक तत्व रक्त परिसंचरण तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं। कोशिकाओं को ऊर्जा (ATP) मिलती है और नए ऊतकों का निर्माण होता है।

निष्कर्ष:
पाचन से भोजन शरीर के ग्रहण करने योग्य बनता है, अवशोषण उसे परिवहन तंत्र (रक्त) में पहुँचाता है, और अंततः स्वांगीकरण उस भोजन को जीवन का आधार (ऊर्जा और शरीर निर्माण) बनाता है। एक के बिना दूसरी प्रक्रिया संभव नहीं है।

Viral Subjective 🧬

Best नियंत्रण एवं समन्वय Class 10 Biology Subjective success Guide

© 2025 Study Portal | Success Guaranteed in Bihar Board Exam!

Scroll to Top