⚡ प्रकाश का अपवर्तन और परावर्तन ⚡
Subjective Important Questions - BSEB Class 10 Physics (भौतिकी)
By Sibtain Sir ⚛️
प्रश्न 1
प्रकाश का अपवर्तन क्या है?
उत्तर
प्रकाश की किरण का एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाने पर दिशा परिवर्तन (मुड़ने) की क्रिया को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
प्रश्न 2
प्रकाश के अपवर्तन के नियमों को लिखें?
उत्तर
प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम हैं:
- (i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- (ii) किसी विशेष रंग के लिए आपतन कोण की ज्या, अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात नियतांक होता है।
μ = sin i / sin r
(यह स्नेल का नियम भी कहलाता है)
प्रश्न 3
पानी से भरी बाल्टी की गहराई कम मालूम पड़ती है क्यों?
अथवा पानी से भरी बाल्टी में रखा सिक्का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर क्यों दिखाई देता है?
उत्तर
अथवा पानी से भरी बाल्टी में रखा सिक्का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर क्यों दिखाई देता है?
पानी से भरी बाल्टी में रखा सिक्का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर दिखाई देता है क्योंकि सिक्के से आने वाली प्रकाश किरणें पानी से वायु में जाते समय अपवर्तन के कारण अभिलंब से दूर मुड़ जाती हैं। आँख इन किरणों को सीधी मानकर पीछे बढ़ाती है जिससे सिक्का ऊँचे स्थान पर दिखाई देता है। इसी कारण बाल्टी की गहराई कम प्रतीत होती है।
प्रश्न 4
⚡ चित्र: क्रांतिक कोण (Critical Angle) - सघन से विरल माध्यम
क्रांतिक कोण (Critical Angle) किसे कहते हैं? समझाएँ।
उत्तर
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है तो वह अभिलंब से दूर हटता है। आपतन कोण बढ़ाने पर अपवर्तन कोण भी बढ़ता है और ऐसा करने के क्रम में जब आपतन कोण पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, उसी आपतन कोण को क्रांतिक कोण कहते हैं। इसे C से दर्शाते हैं।
प्रश्न 5
विवर्तन (Diffraction) क्या है?
उत्तर
विवर्तन एक ऐसी घटना या क्रिया है जिसमें जब कोई प्रकाश किरण बहुत छोटे अपारदर्शी माध्यम से गुजरना चाहती है तो किरण सरल रेखा में न चलने के बजाय इसके किनारे पर मुड़ने की प्रवृत्ति होती है। इसे विवर्तन कहा जाता है।
प्रश्न 6
🔭 चित्र: पेरिस्कोप की संरचना - 45° दर्पण व्यवस्था
पेरिस्कोप किसे कहते हैं? इसके क्या उपयोग हैं?
उत्तर
पेरिस्कोप एक ऐसा प्रकाशीय यंत्र है जो खाइयों या दीवारों के पीछे की वस्तु को देखने में प्रयोग किया जाता है।
अथवा: दो समतल दर्पण या प्रिज्म 45° के कोण पर लगाए जाते हैं, जिससे प्रकाश परावर्तित होकर आँख तक पहुँचे तो इसे पेरिस्कोप कहते हैं।
प्रश्न 7
समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
- ⚡ प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
- ⚡ वस्तु की दूरी प्रतिबिंब की दूरी के बराबर होती है।
- ⚡ प्रतिबिंब पार्श्विक रूप से उल्टा होता है।
- ⚡ प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है।
- ⚡ प्रतिबिंब आभासी होता है।
प्रश्न 8
अवतल दर्पणों के उपयोग लिखिए।
उत्तर
अवतल दर्पण का उपयोग निम्नलिखित रूप में किया जाता है:
- 🔬 (i) हजामती दर्पण के रूप में
- 🏥 (ii) डॉक्टर द्वारा प्रकाश के स्रोत के रूप में
- ☀️ (iii) सौर भट्ठी में प्रकाश को छोटे स्थान पर केंद्रित करने में
- 🚗 (iv) वाहनों के हेडलाइट एवं सर्च लाइट के रूप में
प्रश्न 9
समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है, इसका क्या अर्थ है?
उत्तर
समतल दर्पण के लिए आवर्धन (Magnification) का मान +1 होने का अर्थ है कि — प्रतिबिंब का आकार वस्तु के बराबर तथा सीधा (ऊर्ध्व) होता है, उल्टा नहीं। अर्थात + चिन्ह बताता है कि प्रतिबिंब सीधा है और 1 बताता है कि उसका आकार वस्तु के समान है।
प्रश्न 10
उत्तल लेंस के दो उपयोग बताएँ?
उत्तर
उत्तल लेंस के उपयोग:
- 🔍 (i) आवर्धक शीशा (Magnifying Glass) बनाने में
- 👓 (ii) चश्मों में दूर दृष्टि दोष सुधारने के लिए
- 📷 (iii) कैमरा और प्रोजेक्टर में
- 🔭 (iv) दूरबीन और सूक्ष्मदर्शी में
- ☀️ (v) सूर्य किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करने के लिए
प्रश्न 11
💡 चित्र: प्रकाश का परावर्तन - आपतन और परावर्तन कोण
प्रकाश का परावर्तन किसे कहते हैं? इसके नियमों को लिखें।
उत्तर
प्रकाश किरण का किसी चमकीली सतह से टकराकर वापस लौटने की क्रिया को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं:
- (i) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलम्ब तीनों एक ही समतल में होते हैं।
- (ii) आपतन कोण = परावर्तन कोण होता है।
प्रश्न 12
दिए गए उत्तल लेंस, अवतल लेंस एवं काँच की एक वृत्ताकार पटिका के सतहों को छुए बिना उनकी पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर
उत्तल लेंस, अवतल लेंस एवं काँच की एक वृत्ताकार पिका तीनों को बारी-बारी से किसी पुस्तक के छपे हुए अक्षर के ऊपर लाना है:
- ✅ यदि अक्षर बड़ा दिखाई दे → वह उत्तल लेंस है।
- ✅ यदि अक्षर छोटा दिखाई दे → वह अवतल लेंस है।
- ✅ यदि अक्षर जैसा का तैसा दिखे → वह काँच की वृत्ताकार पटिका है।
प्रश्न 13
हमें वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
उत्तर
उत्तल दर्पण को वाहनों में इसलिए लगाया जाता है क्योंकि:
- 🚗 यह विस्तृत क्षेत्र का दृश्य प्रदान करता है।
- 👁️ इसमें बनने वाला प्रतिबिंब सीधा और छोटा होता है।
प्रश्न 14
🔬 चित्र: उत्तल लेंस - अभिसारी लेंस (किरणों का केंद्रीकरण)
उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस क्यों कहा जाता है?
उत्तर
उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश की समांतर किरणों को अपवर्तित करके एक बिंदु पर एकत्र (अभिसारित) कर देता है। यह बिंदु लेंस का मुख्य फोकस कहलाता है।
प्रश्न 15
उत्तल दर्पण तथा अवतल दर्पण में अंतर लिखिए।
उत्तर
| 🔵 अवतल दर्पण | 🔴 उत्तल दर्पण |
|---|---|
| इसमें प्रवर्तक सतह अंदर धंसा होता है। | इसमें प्रवर्तक बाहर को उभरा होता है। |
| वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बनते हैं। | केवल आभासी प्रतिबिंब बनता है। |
| प्रतिबिंब उल्टा और सीधा दोनों बनते हैं। | सीधा प्रतिबिंब बनता है। |
| प्रतिबिंब बड़ा, छोटा तथा वस्तु के आकार का बनता है। | प्रतिबिंब छोटा बनता है। |
| दृष्टि क्षेत्र कम होता है। | दृष्टि क्षेत्र अधिक होता है। |
| फोकस दूरी धनात्मक होती है। | फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। |
प्रश्न 16
उत्तल लेंस और अवतल लेंस में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर
| 🔵 उत्तल लेंस | 🔴 अवतल लेंस |
|---|---|
| बीच में से मोटा तथा किनारों से पतला होता है। | बीच में पतला तथा किनारों से मोटा होता है। |
| अक्षर बड़े आकार के दिखाई देते हैं। | अक्षर छोटे आकार के दिखाई देते हैं। |
| प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है। | प्रकाश-किरण पुंज को बिखेर देता है। |
| वस्तु का प्रतिबिंब वास्तविक, आभासी तथा उल्टा बनता है। | वस्तु का प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा बनता है। |
| लेंस को बाईं तरफ हिलाएँ तो प्रतिबिंब दायीं तरफ गति करता है। | लेंस को बाईं तरफ हिलाएँ तो प्रतिबिंब भी बाईं तरफ हटेगा। |
| फोकस दूरी धनात्मक होती है। | फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। |
प्रश्न 17
वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब में अंतर क्या है?
उत्तर
| 🔵 वास्तविक प्रतिबिंब | 🔴 आभासी प्रतिबिंब |
|---|---|
| वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। | आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है। |
| वास्तविक प्रतिबिंब सदैव उल्टे होते हैं। | आभासी प्रतिबिंब सदैव सीधे होते हैं। |
| वास्तविक प्रतिबिंब दर्पण के आगे बनता है। | आभासी प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है। |
प्रश्न 18
🌈 चित्र: प्रकाश का प्रकीर्णन - विभिन्न दिशाओं में फैलाव
प्रकाश का प्रकीर्णन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
जब प्रकाश किसी माध्यम के सूक्ष्म कणों से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है, तो इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।
प्रश्न 19
अपवर्तनांक को परिभाषित करें।
उत्तर
किसी माध्यम का अपवर्तनांक (Refractive Index) उस माध्यम में प्रकाश की चाल और निर्वात में प्रकाश की चाल का अनुपात है। इसे प्रतीक n से दर्शाते हैं।
n = c/v
जहाँ c = निर्वात में प्रकाश का वेग तथा v = माध्यम में प्रकाश का वेग।
प्रश्न 20
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
उत्तर
इस कथन का अर्थ है कि प्रकाश का वेग हीरे में, निर्वात की तुलना में 2.42 गुना कम है।
💎 अतः यही कारण है कि हीरे में प्रकाश का अपवर्तन बहुत अधिक होता है, और हीरा अत्यधिक चमकदार और दमकता हुआ दिखाई देता है।
प्रश्न 21
🪞 चित्र: समतल दर्पण में प्रतिबिंब बनने की किरण रेखा आरेख
एक समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब बनने की क्रिया रेखा दिखाएँ।
उत्तर
प्रश्न 22
आभासी प्रतिबिंब क्या है?
उत्तर
किसी बिंदु स्रोत से आती हुई प्रकाश किरणें अपवर्तन (दर्पण में) या परावर्तन (लेंस में) के बाद जिस बिंदु स्रोत से आती हुई मालूम पड़ती हैं उसे उस बिंदु स्रोत का आभासी प्रतिबिंब कहते हैं।
प्रश्न 23
वास्तविक प्रतिबिंब क्या है?
उत्तर
किसी बिंदु स्रोत से आती हुई प्रकाश किरणें अपवर्तन (दर्पण में) या परावर्तन (लेंस में) के बाद जिस बिंदु पर वास्तव (असल) में मिलती हैं उसे उस बिंदु स्रोत का वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं।
प्रश्न 24
लेंस की क्षमता से क्या समझते हैं?
उत्तर
लेंस की ऐसी क्षमता जिससे वह आती हुई प्रकाश किरणों को अभिसारित या अपसारित करता है, लेंस की क्षमता कहलाता है। इसका प्रचलित मात्रक डायोप्टर है।
लेंस की क्षमता (P) = 1/f (मीटर में)
प्रश्न 25
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ (लाल) इसलिए दिखाई देता है क्योंकि उस समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल की अधिक मोटी परत से होकर गुजरता है। वायुमंडल के सूक्ष्म कण नीले और बैंगनी रंग के प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन कर देते हैं, जबकि लाल रंग की तरंगदैर्घ्य अधिक होने के कारण वह कम प्रकीर्णित होकर हमारी आँखों तक पहुँचती है।
🌅 इसी कारण सूर्य उस समय लाल या रक्ताभ दिखाई देता है।
प्रश्न 26
⚛️ चित्र: अभिसारी लेंस (बाएं) और अपसारी लेंस (दाएं)
अवतल लेंस को अपसारी लेंस कहते हैं, एवं उत्तल को अभिसारी लेंस कहते हैं, क्यों?
उत्तर
🔴 अवतल लेंस: अवतल लेंस को अपसारी लेंस कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण को अपसारित (फैला देना) कर देता है।
🔵 उत्तल लेंस: उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण को अभिसारित (बिंदु रूप में) कर देता है।
🔵 उत्तल लेंस: उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण को अभिसारित (बिंदु रूप में) कर देता है।
प्रश्न 27
📐 चित्र: काँच के आयताकार स्लैब में पार्श्विक विस्थापन
पार्श्विक विस्थापन से आप क्या समझते हैं?
अथवा, काँच के आयताकार स्लैब में अपवर्तन की दो किरणों को दिखाएँ।
उत्तर
अथवा, काँच के आयताकार स्लैब में अपवर्तन की दो किरणों को दिखाएँ।
किसी स्लैब से होकर गुजरने वाली किरण के लिए आपतित किरण और निर्गत किरण एक दूसरे के समांतर होती हैं। इन दोनों किरणों के बीच की लांबिक दूरी को पार्श्विक विस्थापन कहते हैं।
प्रश्न 28
नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के अनुसार गोलीय लेंस में आवर्धन किस प्रकार बदलता है?
उत्तर
🔵 उत्तल लेंस के लिए:
- जब प्रतिबिंब आभासी होता है तो आवर्धन धनात्मक (+) होता है।
- जब प्रतिबिंब वास्तविक होता है तो आवर्धन ऋणात्मक (–) होता है।
- अवतल लेंस हमेशा आभासी प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए इसका आवर्धन सदैव धनात्मक (+) होता है।
👉 अर्थात आवर्धन का चिन्ह प्रतिबिंब की प्रकृति को दर्शाता है।
प्रश्न 29
तारे टिमटिमाते हैं, किन्तु ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं। क्यों?
उत्तर
⭐ तारे टिमटिमाते हैं क्योंकि: वे पृथ्वी से बहुत दूर होते हैं और हमें वे बिंदु स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। उनका प्रकाश वायुमंडल की असमान परतों से होकर गुजरता है, जिससे बार-बार अपवर्तन होता रहता है और उनकी चमक बदलती रहती है।
🪐 ग्रह नहीं टिमटिमाते क्योंकि: वे पृथ्वी के अपेक्षाकृत पास होते हैं और उनका आकार हमें एक छोटे चक्राकार पिंड की तरह दिखाई देता है। इसलिए उनके प्रकाश में होने वाला हल्का परिवर्तन औसत हो जाता है और वे स्थिर चमकते हैं।
🪐 ग्रह नहीं टिमटिमाते क्योंकि: वे पृथ्वी के अपेक्षाकृत पास होते हैं और उनका आकार हमें एक छोटे चक्राकार पिंड की तरह दिखाई देता है। इसलिए उनके प्रकाश में होने वाला हल्का परिवर्तन औसत हो जाता है और वे स्थिर चमकते हैं।
निष्कर्ष: वायुमंडल के अधिक अपवर्तन के कारण तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं।
प्रश्न 30
प्रधान फोकस और फोकस में क्या अंतर है?
उत्तर
| बिंदु | प्रधान फोकस (Principal Focus) | फोकस (Focus) |
|---|---|---|
| अर्थ | वह मुख्य बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर किरणें अपवर्तन/परावर्तन के बाद मिलती हैं। | वह कोई भी बिंदु जहाँ प्रकाश किरणें मिलती हैं। |
| संख्या | प्रत्येक लेंस/दर्पण के दो प्रधान फोकस होते हैं। | फोकस के कई हो सकते हैं। |
| प्रतीक | F₁ और F₂ से दर्शाते हैं। | सामान्यतः F से दर्शाया जाता है। |
प्रश्न 31
आकाश का रंग नीला किस परिघटना के कारण है?
उत्तर
आकाश का रंग नीला दिखाई देता है क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन की घटना है। इस क्रिया में जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है तो वायुमंडल के सूक्ष्म कण सूर्य प्रकाश के नीले रंग को प्रकीर्णित कर अपवर्तित कर देते हैं और देखने वाले जब वायुमंडल द्वारा आकाश को देखते हैं तो वह नीला दिखाई देता है।
प्रश्न 32
स्नेल का नियम क्या है?
उत्तर
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो आपतन कोण और अपवर्तन कोण के बीच जो निश्चित संबंध होता है, उसे स्नेल का नियम कहते हैं।
n₂₁ = दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक
sin i / sin r = स्थिर = n₂₁
जहाँ i = आपतन कोण, r = अपवर्तन कोणn₂₁ = दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक
प्रश्न 33
📊 चित्र: उत्तल दर्पण से R = 2f का गणितीय प्रमाण
उत्तल दर्पण से R = 2f सिद्ध करें या ज्ञात करें।
उत्तर
माना उत्तल दर्पण की:
ज्यामिति से: ∠CBF = ∠BCF
अतः BF = CF (समान कोणों के सामने की भुजाएँ समान होती हैं)
दर्पण छोटा होने के कारण: BF = PF
इसलिए PF = CF
लेकिन PC = R और PF = CF = PC/2
अतः f = R/2
- फोकस दूरी = f
- वक्रता त्रिज्या = R
ज्यामिति से: ∠CBF = ∠BCF
अतः BF = CF (समान कोणों के सामने की भुजाएँ समान होती हैं)
दर्पण छोटा होने के कारण: BF = PF
इसलिए PF = CF
लेकिन PC = R और PF = CF = PC/2
अतः f = R/2
∴ R = 2f
✅ इस प्रकार सिद्ध होता है कि उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या उसकी फोकस दूरी की दो गुनी होती है।
प्रश्न 34
📐 चित्र: अवतल दर्पण से R = 2f का गणितीय प्रमाण
अवतल दर्पण से R = 2f सिद्ध करें।
उत्तर
AB प्रकाश किरण मुख्य अक्ष के समांतर है। AB किरण दर्पण से परावर्तन के बाद F (फोकस) से होकर गुजरती है।
CB को मिलाया गया: ∠ABC = ∠CBF = i = r
इसलिए AB ∥ XX'
∠CBF = ∠ABC = ∠BCF
इसलिए CF = BF
B बिंदु P के समीप होने पर: BF = PF
इसलिए CP = PF = f
CP = R (वक्रता त्रिज्या)
इसलिए CP = CF + PF
R = f + f = 2f
CB को मिलाया गया: ∠ABC = ∠CBF = i = r
इसलिए AB ∥ XX'
∠CBF = ∠ABC = ∠BCF
इसलिए CF = BF
B बिंदु P के समीप होने पर: BF = PF
इसलिए CP = PF = f
CP = R (वक्रता त्रिज्या)
इसलिए CP = CF + PF
R = f + f = 2f
∴ R = 2f
अतः वक्रता त्रिज्या = 2 × फोकसांतर
प्रश्न 35
🧮 चित्र: अवतल दर्पण से दर्पण सूत्र का व्युत्पन्न गणितीय प्रमाण
अवतल दर्पण से दर्पण सूत्र ज्ञात करें।
उत्तर
दिया गया है:
त्रिभुज △B'A'F एवं △PMF समान हैं:
B'A'/PM = B'F/FP
PM ≈ AB (छोटे दर्पण के लिए)
इसलिए: B'A'/AB = B'F/FP ... (1)
△A'B'P एवं △ABP में समानता से:
B'A'/AB = B'P/BP ... (2)
(1) और (2) से: B'F/FP = B'P/BP
B'F = B'P – FP
(B'P – FP)/FP = B'P/BP
B'P = –v, FP = –f, BP = –u रखने पर:
(–v + f)/(–f) = v/u
(v – f)/f = v/u
u(v – f) = fv
uv = fv + uf = f(v + u)
- P = दर्पण का ध्रुव (Pole)
- F = फोकस (Focus), PF = f
- AB = वस्तु, A'B' = प्रतिबिंब
- u = वस्तु दूरी (PA = –u)
- v = प्रतिबिंब दूरी (PA' = –v)
त्रिभुज △B'A'F एवं △PMF समान हैं:
B'A'/PM = B'F/FP
PM ≈ AB (छोटे दर्पण के लिए)
इसलिए: B'A'/AB = B'F/FP ... (1)
△A'B'P एवं △ABP में समानता से:
B'A'/AB = B'P/BP ... (2)
(1) और (2) से: B'F/FP = B'P/BP
B'F = B'P – FP
(B'P – FP)/FP = B'P/BP
B'P = –v, FP = –f, BP = –u रखने पर:
(–v + f)/(–f) = v/u
(v – f)/f = v/u
u(v – f) = fv
uv = fv + uf = f(v + u)
1/f = 1/v + 1/u
✅ यही दर्पण सूत्र है।
⚛️ © 2025 Padho India Hub ⚛️
Prepared by Sibtain Sir
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🔬 All diagrams included for complete understanding 📚
